

Donald Trump on Vladimir Putin kidnapping: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद पूरी दुनिया में सनसनी फैल गई है। इस घटना ने एक नई बहस को जन्म दिया है कि क्या अमेरिका अब अन्य वैश्विक नेताओं के खिलाफ भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई करेगा। खास तौर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीति में आक्रामकता बढ़ रही है और ईरान जैसे देश अमेरिका को खुली चेतावनी दे रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब सीधा सवाल पूछा गया कि क्या वे पुतिन को भी मादुरो की तरह पकड़ने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी, हालांकि उन्होंने पुतिन के वर्तमान व्यवहार पर अपनी गहरी निराशा भी व्यक्त की है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अतीत में उनके संबंध पुतिन के साथ अच्छे रहे थे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं।
अमेरिका ने हाल ही में वेनेजुएला पर एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन कर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया था। उन पर अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी और हथियारों से संबंधित गंभीर अपराधों के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह डर बैठ गया है कि क्या अमेरिका अब नेताओं को सीधे पकड़ने की नीति पर चलेगा।
इसी दौरान ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वह भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए एक नए ढांचे पर विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था पर बातचीत चल रही है और तेल के व्यापार पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण रहेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि यह सुविधा भविष्य में अन्य मित्र देशों के लिए भी खोली जा सकती है।
वेनेजुएला की घटना के बाद ईरान के नेताओं ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप को ही हिरासत में लेने की धमकी दे डाली है। हसन रहिमपुर अजघादी ने कहा कि ईरान को भी ट्रंप के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा अमेरिका ने निकोलस मादुरो के साथ किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर ईरान अमेरिका की धरती के भीतर घुसकर भी सैन्य ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है।
यह पूरी जुबानी जंग ऐसे समय में हो रही है जब ईरान खुद भारी आर्थिक संकट और आंतरिक नागरिक प्रदर्शनों का सामना कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वहां महंगाई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को दबाने के लिए की गई फायरिंग में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति और विपक्षी देशों की धमकियों ने दुनिया को एक नए शीत युद्ध जैसी अनिश्चितता के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।