Bangladesh Election: शेख हसीना की सीट पर हिंदू नेता का नामांकन रद्द, यूनुस सरकार पर उठे सवाल

Hindu Candidate Rejected: बांग्लादेश चुनाव में शेख हसीना की सीट से हिंदू नेता गोबिंददेब का नामांकन रद्द कर दिया गया है। 50% हिंदू आबादी वाली इस सीट पर यूनुस सरकार और BNP पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं।
Bangladesh Polls: Hindu Leader’s Nomination Rejected from Hasina's Seat Amid Yunus Rule
शेख हसीना और मोहम्मद यूनुस (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Bangladesh Hindu Minority Election Persecution 2026: बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से पहले अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और दमन की खबरें तेज हो गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के गढ़ माने जाने वाले गोपालगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र में हिंदू नेता गोबिंददेब प्रमाणिक का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है। इस सीट पर 50% से अधिक हिंदू मतदाता हैं और प्रमाणिक को वहां 'हिंदुओं की आवाज' के रूप में देखा जा रहा था।

अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के शासन में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों और राजनीतिक रूप से उन्हें हाशिए पर धकेलने के प्रयासों ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। निष्पक्ष चुनाव कराने का दावा करने वाली यूनुस सरकार अब विपक्षी दबाव और सांप्रदायिक पक्षपात के आरोपों के घेरे में खड़ी नजर आ रही है।

गोबिंददेब प्रमाणिक का नामांकन खारिज

रिटर्निंग ऑफिसर ने शनिवार को गोपालगंज-3 सीट से गोबिंददेब प्रमाणिक के नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया। प्रमाणिक बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत के महासचिव हैं और इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ना चाहते थे। प्रशासन ने 1% समर्थकों के हस्ताक्षर में विसंगति का हवाला देते हुए यह कड़ा फैसला लिया है, जिसे प्रमाणिक ने पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताया है।

BNP पर डराने-धमकाने का आरोप

प्रमाणिक ने आरोप लगाया कि खालिदा जिया की पार्टी BNP के कार्यकर्ताओं ने उन मतदाताओं को जान से मारने की धमकी दी जिन्होंने उनके नामांकन का समर्थन किया था। धमकियों के कारण कई समर्थकों को रिटर्निंग ऑफिसर के सामने झूठ बोलने पर मजबूर किया गया कि उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। इसी दबाव के आधार पर अधिकारी ने उनके वैध हस्ताक्षरों को रद्द कर दिया ताकि वे चुनावी मैदान से बाहर हो सकें।

गोपालगंज-3 का चुनावी समीकरण

गोपालगंज-3 सीट का गणित काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां के लगभग 3 लाख मतदाताओं में से आधे से ज्यादा सनातनी हिंदू हैं। शेख हसीना के जाने के बाद यह सीट राजनीतिक रूप से खाली थी, जहां प्रमाणिक की जीत की प्रबल संभावना जताई जा रही थी। BNP और अन्य कट्टरपंथी ताकतों को डर था कि अगर हिंदू एकजुट होकर मतदान करते हैं, तो उनकी हार निश्चित है, इसीलिए नामांकन रद्द करने की साजिश रची गई।

अल्पसंख्यकों में बढ़ता खौफ

बांग्लादेश में हाल के हफ्तों में तीन हिंदुओं की हत्या के बावजूद यूनुस सरकार की चुप्पी ने अल्पसंख्यकों के मन में डर पैदा कर दिया है। न केवल प्रमाणिक, बल्कि दुलाल विश्वास जैसे अन्य हिंदू उम्मीदवारों के नामांकन में भी तकनीकी अड़चनें पैदा की जा रही हैं। प्रमाणिक ने इस फैसले के खिलाफ चुनाव आयोग में अपील करने और आवश्यकता पड़ने पर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी है ताकि लोकतंत्र की रक्षा हो सके।

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