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Birthday Special: ममता बनर्जी के फर्श से अर्श तक का सफर, संघर्ष के अनसुने किस्से जिसने बनाया ‘दीदी’
Mamata Banerjee Birthday: पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का जीवन गरीबी, संघर्ष और अदम्य इच्छाशक्ति की मिसाल है। उनके जन्मदिन पर जानिए जीवन के अनछुए पहलू, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और उनकी सादगी का राज।
- Written By: प्रतीक पांडेय

ममला बनर्जी, फोटो- सोशल मीडिया
Mamata Banerjee Biography: भारतीय राजनीति में ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने अपनी मेहनत और संघर्ष से एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज है। 34 साल के वामपंथी शासन को उखाड़ फेंकने वाली ममता की कहानी केवल सत्ता की नहीं, बल्कि एक साधारण लड़की के असाधारण व्यक्तित्व की है।
ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता के एक गरीब बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका शुरुआती जीवन अभावों और कठिनाइयों के बीच बीता। जब वह महज 17 वर्ष की थीं, तब उनके पिता प्रोमलेश्वर बनर्जी का निधन इलाज के अभाव में हो गया था। पिता की मृत्यु के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां गायत्री देवी पर आ गई। ममता ने बचपन से ही अपनी मां का हाथ बंटाने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ काम करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपनी उच्च माध्यमिक शिक्षा देशबंधु शिशु शिक्षालय से पूरी की और इसके बाद जोगमाया देवी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। शिक्षा के प्रति उनकी लगन ऐसी थी कि उन्होंने इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री और बाद में कानून की पढ़ाई भी पूरी की।
उम्र का रहस्य: सर्टिफिकेट से 5 साल छोटी हैं ममता?
ममता बनर्जी की उम्र को लेकर एक बेहद दिलचस्प तथ्य यह है कि वह अपनी आधिकारिक उम्र से पांच साल छोटी हैं। स्वयं ममता ने एक बार खुलासा किया था कि जब वह स्कूल की अंतिम परीक्षा दे रही थीं, तब उनकी उम्र 15 साल से कम थी, जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता था। इस कानूनी बाधा से बचने के लिए उनके पिता ने स्कूल सर्टिफिकेट में एक काल्पनिक जन्मतिथि (5 जनवरी 1955) लिखवा दी, जो उनकी वास्तविक उम्र से पांच साल ज्यादा थी। ममता के अनुसार, उनका वास्तविक जन्म 5 अक्टूबर को हुआ था। उनकी मां उन्हें दुर्गा पूजा की अष्टमी के दिन चावल की खीर खिलाकर उनका जन्मदिन मनाती थीं। इस तरह, दुनिया के लिए 5 जनवरी आधिकारिक तारीख बन गई, जबकि उनकी मां के पास मौजूद राशिफल में तारीख कुछ और ही थी।
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सेल्सगर्ल और स्टेनोग्राफर से मुख्यमंत्री तक का सफर
राजनीति के शिखर पर पहुंचने से पहले ममता बनर्जी ने आजीविका चलाने के लिए कई छोटे-बड़े काम किए। बताया जाता है कि उन्होंने एक स्टेनोग्राफर के रूप में नौकरी की और प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका के तौर पर भी काम किया। इतना ही नहीं, उन्होंने एक निजी ट्यूटर और यहां तक कि एक सेल्सगर्ल के रूप में भी संघर्ष किया। यह अनुभव ही था जिसने उन्हें जमीन से जुड़े रहने और आम जनता के दर्द को समझने की शक्ति दी। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने राजनीति में कदम रख दिया था और अपनी तेजतर्रार छवि के कारण वह जल्द ही कांग्रेस के भीतर एक उभरता हुआ चेहरा बन गईं।
सोर्स- AI
राजनीति में ऐतिहासिक उदय और TMC की स्थापना
ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस के साथ की और 1976 में महिला कांग्रेस (आई) की महासचिव बनीं। 1984 के लोकसभा चुनावों में उन्होंने जादवपुर निर्वाचन क्षेत्र से दिग्गज कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी को हराकर इतिहास रच दिया और देश की सबसे युवा सांसदों में से एक बनीं। 1991 में उन्होंने पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में मानव संसाधन विकास, युवा मामले, खेल और महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला। हालांकि, कांग्रेस के साथ उनके वैचारिक मतभेद बढ़ते गए और 1997-98 में उन्होंने अपनी अलग पार्टी ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) की स्थापना की।
सिंगूर, नंदीग्राम और वामपंथ का अंत
ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ 2005-2006 के दौरान आया जब उन्होंने सिंगूर में टाटा नैनो फैक्ट्री के लिए और नंदीग्राम में केमिकल हब के लिए सरकार द्वारा जबरन भूमि अधिग्रहण का पुरजोर विरोध किया। इस आंदोलन ने उन्हें ‘जनता की दीदी’ के रूप में स्थापित कर दिया। उनके कड़े संघर्ष का परिणाम यह हुआ कि 2011 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने प्रचंड जीत हासिल की और पश्चिम बंगाल में 34 साल से चले आ रहे वामपंथी शासन का अंत कर दिया। वह पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
सादगी और अनोखी जीवनशैली
ममता बनर्जी अपनी सादगी के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं। वह आज भी कोलकाता के हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने पैतृक खपरैल वाले घर में रहती हैं, जो बारिश के दौरान जलमग्न हो जाता है। उनकी पहचान उनकी सादी सफेद सूती साड़ी (धनेखली बुनाई), हवाई चप्पल और कंधे पर लटका हुआ सूती झोला है। वह अपनी फिटनेस का बहुत ध्यान रखती हैं और प्रतिदिन ट्रेडमिल पर या पैदल 5-6 किलोमीटर चलती हैं। उनके चलने की रफ्तार इतनी तेज होती है कि अक्सर उनके साथ चलने वाले पत्रकारों और सहयोगियों को दौड़ना पड़ता है। वह मसालेदार भोजन और अचार से परहेज करती हैं और उनके आहार में मुरमुरे, चाय और कभी-कभार आलू चॉप शामिल होते हैं।

कला और साहित्य से गहरा लगाव
राजनीति के अलावा ममता बनर्जी एक प्रतिभाशाली पेंटर और लेखिका भी हैं। उन्होंने अब तक दो दर्जन से अधिक पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें ‘स्ट्रगल फॉर एग्जिस्टेंस’ और ‘स्लॉटर ऑफ डेमोक्रेसी’ प्रमुख हैं। वह एक शौकिया चित्रकार हैं और उनकी पेंटिंग्स करोड़ों रुपये में बिकी हैं, जिसका पैसा वह अक्सर पार्टी फंड या सामाजिक कार्यों में दान कर देती हैं। उनकी एक पेंटिंग ‘फ्लॉवर पावर’ न्यूयॉर्क में 3000 डॉलर में नीलाम हुई थी। उन्हें रवींद्र संगीत और प्रकृति फोटोग्राफी का भी गहरा शौक है।
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दुनिया की प्रभावशाली महिलाओं में शुमार
ममता बनर्जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और राजनीतिक कौशल का लोहा दुनिया ने माना है। 2012 में ‘टाइम मैगजीन’ ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था। उसी वर्ष ‘ब्लूमबर्ग मार्केट्स’ पत्रिका ने उन्हें वित्त की दुनिया के 50 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में स्थान दिया। नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, ममता बनर्जी बंगाल में अपनी सत्ता बचाने और एक मजबूत महिला नेता के रूप में खुद को स्थापित रखने में सफल रही हैं।
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