टीचर बनी जल्लाद, होमवर्क नहीं करने पर नर्सरी के बच्चे को पेड़ से घंटों लटकाया; चीखता रहा मासूम-VIDEO

Surajpur Viral Video दो महिला टीचर ने LKG के 4 साल के बच्चे को अमानवीय सजा दी। आरोप है कि होमवर्क न करने पर बच्चे को पेड़ पर लटका दिया गया। इसका वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की।
In Surajpur, two female teachers gave inhuman punishment to an LKG child by hanging him from a tree for not doing his homework. After the video went viral, the education department started an investigation.
वायरल वीडयो का स्क्रीनशॉट और बच्चे की तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
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 LKG Student Abuse : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक निजी स्कूल की दो महिला टीचर का शर्मनाक व्यवहार सामने आया है। नारायणपुर गांव के हंस वाहिनी विद्या मंदिर स्कूल में LKG के एक 4 साल के बच्चे को सिर्फ इसलिए खौफनाक सजा दी गई क्योंकि वह अपना होमवर्क करके स्कूल नहीं आया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि महिला टीचर ने बच्चे का कपड़ा उतरवाया और उसकी शर्ट से उसे पेड़ पर लटका दिया। सजा देने का यह पूरा मामला पास की एक छत पर खड़े एक युवक ने अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर फैला, लोगों में गुस्सा बढ़ गया और शिक्षा विभाग तुरंत हरकत में आ गया।

वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई

वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने एक जांच अधिकारी को स्कूल भेजा। जांच अधिकारी ने भी माना कि दोनों टीचर का यह व्यवहार बिल्कुल गलत है और किसी भी स्थिति में ऐसे छोटे बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में जिले के वरिष्ठ अधिकारी आगे की कार्रवाई तय करेंगे।

स्कूल के अन्य टीचर इस घटना पर कैमरे के सामने कुछ भी कहने से बचते नज़र आए। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि स्कूल प्रशासन को इस अमानवीय सजा के बारे में पहले से जानकारी थी या नहीं। अगर थी, तो उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती?

होमवर्क ना करने की वजह से बच्चे को पेड़ से लटकाया

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर सजा देने के दौरान बच्चे के साथ कोई अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? सिर्फ होमवर्क न करने की वजह से इतने छोटे बच्चे को पेड़ से लटका देना किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता।

फिलहाल बच्चा सुरक्षित है, लेकिन इस घटना ने निजी स्कूलों में बच्चों को दी जाने वाली सजा, उनकी सुरक्षा और शिक्षकों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि बच्चों की शिक्षा का उद्देश्य उन्हें डर से नहीं, बल्कि प्यार और समझ से आगे बढ़ाना होना चाहिए।

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