बोर्ड परीक्षाओं के बीच शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी, शिक्षा जगत में गहराया भारी असंतोष

BLO Training Issue: बोर्ड परीक्षाओं के बीच शिक्षकों पर चुनाव ड्यूटी थोपे जाने से भंडारा में शिक्षा जगत में भारी आक्रोश है, जबकि सरकार ने राहत का आश्वासन दिया है।
Teachers Election Duty
Board Exam Maharashtra: (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Bhandara Education News: महाराष्ट्र राज्य परीक्षा मंडल की ओर से आयोजित 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं इन दिनों पूरे जोर-शोर से जारी हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में जिले के शिक्षकों पर चुनाव ड्यूटी और प्रशिक्षण का अतिरिक्त भार डालने से शिक्षा जगत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। प्रशासनिक दबाव के चलते शिक्षकों के सामने यह धर्मसंकट खड़ा हो गया है कि वे छात्रों का भविष्य संवारें या चुनावी आंकड़ों में उलझे रहें।

वर्तमान में शिक्षकों के कंधों पर बोर्ड परीक्षाओं के सफल संचालन, परीक्षा हॉल की व्यवस्था, पर्यवेक्षण, सुरक्षा नियोजन, सीसीटीवी निगरानी और कॉपी-मुक्त अभियान जैसे गंभीर कार्यों की जिम्मेदारी है। साथ ही मौजूदा शैक्षणिक सत्र का पाठ्यक्रम पूरा करना और छात्रों का अभ्यास लेना भी उनकी प्राथमिकता है। लेकिन शासन की ओर से बार-बार थोपे जा रहे ऑनलाइन और ऑफलाइन चुनावी कार्यों ने शिक्षकों को हताश कर दिया है। शिक्षकों का आरोप है कि इस दोहरे बोझ के कारण वे छात्रों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता गिर रही है और वे बंद होने की कगार पर पहुंच रहे हैं।

27 को प्रशिक्षण शिविर

इसी बीच भंडारा के उपविभागीय अधिकारी एवं मतदाता पंजीकरण अधिकारी की ओर से जारी एक नए निर्देश ने आग में घी डालने का काम किया है। इस आदेश के तहत 27 फरवरी को सुबह 11 बजे से भंडारा विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और सुपरवाइजरों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।

तहसील कार्यालय और नगर परिषद माइनॉरिटी हॉस्टल में होने वाले इस प्रशिक्षण में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण, मैपिंग और बीएलओ ऐप की जानकारी दी जाएगी। उपविभागीय अधिकारी माधुरी तिखे ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस ट्रेनिंग से कोई भी शिक्षक या कर्मचारी अनुपस्थित नहीं रहना चाहिए। शिक्षकों का सवाल है कि बोर्ड परीक्षा के इस संवेदनशील समय में वे उत्तर पुस्तिकाएं जांचें या प्रशिक्षण में शामिल हों। शिक्षकों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि पढ़ाई-लिखाई को बाधित कर जानबूझकर निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सदन में भी गूंजा मामला

इस मुद्दे पर शिक्षक विधायक म्हात्रे ने सदन में आवाज उठाते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षकों को चुनाव कार्य देना और कार्रवाई की धमकी देना पूरी तरह अनुचित है। इस पर राज्य के शिक्षा मंत्री पंकज भोयर ने जवाब दिया कि परीक्षा के दौरान किसी भी शिक्षक पर कार्रवाई न करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए जाएंगे।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि शिक्षकों को इन कार्यों से मुक्त रखने के लिए विधायकों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की जाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सरकार शिक्षकों को इस अतिरिक्त बोझ से मुक्ति दिलाकर उन्हें छात्रों की सेवा का पूरा अवसर देगी।

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