
73 साल के BJP विधायक ने 30 साल के 'महाराज' के बेटे के पैर छुए
Scindia Son and BJP MLA Feet Touche Viral Video: मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। अक्सर हम बड़ों का सम्मान करते हैं और उनके चरण स्पर्श करते हैं, लेकिन यहां नजारा बिल्कुल उल्टा था। 73 साल के बुजुर्ग और अनुभवी विधायक ने अपने से आधी उम्र से भी कम, महज 30 साल के नेता पुत्र के पैर छुए। यह नजारा देख वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया और अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है।
दरअसल, 5 जनवरी को शिवपुरी के विधायक देवेंद्र जैन का जन्मदिन था। इस मौके पर एक खेल कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महानआर्यमन सिंधिया मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। मंच पर केक कटने का जश्न चल रहा था। महानआर्यमन ने विधायक को अपने हाथों से केक खिलाया। इसके तुरंत बाद, सम्मान और राजनीति के अजीब मेल में, 73 वर्षीय विधायक ने झुककर 30 वर्षीय महानआर्यमन के पैर छुए और उनसे आशीर्वाद लिया।
शिवपुरी के 72 वर्षीय विधायक देवेंद्र जैन ने खुद से 42 साल छोटे महाआर्यमन सिंधिया के पैर छुए। आजादी के 78 साल बाद राजा रजवाडों के लिए प्रिवी पर्स के न होने पर करना तो सही है। अब MLA बने रहने के लिए सम्मान… नहीं आत्मसम्मान से समझौता तो बनता है।#Scindiasonviralvideo #MP #Shivpuri pic.twitter.com/E019EY79r1 — Sourabh Sharma (@SourabhPaliya) January 8, 2026
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। लोग हैरान हैं और सवाल उठा रहे हैं कि देवेंद्र जैन पिछले 30-35 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं, उनका अनुभव ही महानआर्यमन की कुल उम्र से ज्यादा है। भारतीय संस्कृति में बड़ों के पैर छूने की परंपरा है, लेकिन यहां उल्टी गंगा बहती देख लोग इसे सियासी नफे-नुकसान से जोड़ रहे हैं। आम जनता का कहना है कि सम्मान उनका किया जाता है जो उम्र, अनुभव या योग्यता में श्रेष्ठ हों, लेकिन राजनीति में शायद रसूख और वंशवाद ही सबसे ऊपर है।
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वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यही राजनीति है साहब, यहां जो कराया जाए वो कम है। अगर पैर छूने से आका की नजरों में नंबर बढ़ते हैं, तो इसमें क्या हर्ज है। वहीं, आलोचकों ने इसे गुलामी की मानसिकता बताया है। लोगों का कहना है कि यह मनुवादी सोच का प्रतीक है जहां पिछड़े और आदिवासी वर्ग के नेता आज भी पुरानी गुलामी की परंपरा को छोड़ नहीं पा रहे हैं। एक बुजुर्ग विधायक का एक युवा के पैरों में झुकना यह दर्शाता है कि राजनीति में पद और कद के मायने कैसे बदल गए हैं।






