
CM योगी
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि राज्य में कैबिनेट विस्तार अब ज्यादा दूर नहीं है। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई, जिसे सियासी गलियारों में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
सीएम योगी के दिल्ली दौरे का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उनके कार्यक्रम में बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात भी शामिल है। यूपी में पिछले कई महीनों से कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं चल रही हैं और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
फिलहाल राज्य सरकार में 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। यानी अभी 6 पद रिक्त हैं। इसके अलावा लोकसभा चुनाव 2024 के बाद कुछ मंत्री केंद्र सरकार में चले गए, जिससे खाली पदों की संख्या और बढ़ गई।
जातीय संतुलन मजबूत करना, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और पूर्वांचल को समान प्रतिनिधित्व देना पार्टी की प्राथमिकता है। साथ ही ओबीसी और एससी वर्ग को कैबिनेट में शामिल कर 2027 चुनाव की जमीन मजबूत करने की तैयारी है। भाजपा ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ओबीसी समाज को साधने की पहल पहले ही कर दी है।
भूपेंद्र चौधरी (जाट समाज)
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली जाट नेता। मीडिया रिपोर्ट्स में इन्हें सबसे मजबूत दावेदार बताया जा रहा है।
पूजा पाल (पाल समाज)
ओबीसी वर्ग के अहम पाल समाज से किसी नए चेहरे को शामिल किए जाने की चर्चा जोरों पर है।
कृष्ण पासवान (पासवान समाज)
दलित यानी एससी प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए पासवान समाज से नए नाम पर विचार किया जा सकता है।
रामरतन कुशवाहा (कुशवाहा समाज)
कुशवाहा समाज भाजपा का मजबूत आधार रहा है, इसलिए इस समुदाय से प्रतिनिधित्व बढ़ने की संभावना है।
मनोज पांडे (ब्राह्मण समाज)
ब्राह्मण समाज में हालिया सक्रियता और असंतोष को देखते हुए नए ब्राह्मण चेहरे को जगह मिल सकती है।
आशीष कुमार आशु (कुर्मी समाज)
ओबीसी राजनीति की धुरी माने जाने वाले कुर्मी समाज से अतिरिक्त प्रतिनिधित्व के संकेत मिल रहे हैं।
पद्मसेन चौधरी (कुर्मी समाज)
कुर्मी समाज से एक और संभावित दावेदार, जिन्हें संगठन और सरकार—दोनों के लिहाज से उपयोगी माना जा रहा है।
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ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, मकर संक्रांति (14–15 जनवरी 2026) के तुरंत बाद कैबिनेट विस्तार की सबसे ज्यादा संभावना जताई जा रही है। यह संभावित कैबिनेट विस्तार 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधकर भाजपा की चुनावी रणनीति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठकों ने इस अटकल को और बल दिया है कि टीम योगी में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री हो सकती है।






