
प्रतिकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स सोशल मीडिया)
लखीमपुर खीरी : प्रतिभाशाली लोगों को कोई सीमा आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती और यह साबित किया है लखीमपुर खीरी के 28 वर्षीय मुनीर खान ने। दरअसल मुनीर ने अपने तकनीकी कौशल और इनोवेशन से ऐसा कमाल किया है कि हर कोई उनकी तारीफ करते नहीं थक रहा। मुनीर खान ने एक विशेष तरह का AI युक्त चश्मा इजाद किया है जो खास दृष्टि बाधित लोगों के लिए मददगार साबित होगा।
इस खास AI चश्मे को AI-विजन प्रो का नाम दिया गया है। मुनीर ने अमेरिका से फोन पर पीटीआई को बताया, “दृष्टि बाधित लोगों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त चश्मे 17 से 19 दिसंबर तक IIT, मुंबई में आयोजित टेकफेस्ट में लोगों को दिए जाएंगे।”इन चश्मों से लोगों को रोजाना के जीवन में सहूलियत मिलेगी। सेंसर्स, कैमरे, एनविडिया जेटसन प्रोसेसर्स, लिडार टेक्नोलॉजी और एआई मॉडल कंप्यूटेशन से एकीकृत विजनप्रो चश्मे इसे पहनने वाले को आसपास के वातावरण की सटीक अनुभूति देंगे।
इस खास चश्मे को पहनने पर AI युक्त ग्लास से चेहरे की पहचान में मदद मिलेगी। इससे लोग दवाओं और खाने पीने की वस्तुओं में भी भेद कर पाएंगे। इसकी मदद से चलते फिरते समय अड़चनों को भी आसानी से पहचाना जा सकेगा। इसे पहनने वाले छपी हुई सामग्री को पढ़कर उसका अर्थ भी आसानी से समझ सकेंगे। मुनीर ने बताया कि IIT बांबे में एशिया के सबसे बड़े टेकफेस्ट के दौरान आयोजकों ने पहली बार इस अनूठे चश्मे का अनावरण करने की घोषणा की।
मुनीर खान इससे पहले भी कई इनोवेशन कर चुके हैं जिन्होंने लोगों की रोजाना की जिंदगी को आसान बनाया है। इसमें कोलंबिया यूनिवर्सिटी में विकसित हाइड्रोहोमी नाम का स्मार्ट वाटर बॉटल और मिट्टी की जांच वाला स्मार्ट डिवाइस भी शामिल है। स्मार्ट वाटर बॉटल इस्तेमाल करने वाले को शरीर में पानी का स्तर पता लगाकर तत्काल पानी पीने का सुझाव देता है। वहीं, मिट्टी की जांच वाला स्मार्ट डिवाइस किसानों को मिनटों में अपनी मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की पहचान करने में मदद करता है। मुनीर के स्मार्ट वाटर बॉटल को कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने सर्वोत्तम प्रोजेक्ट का अवार्ड भी दिया है जबकि मिट्टी की जांच करने वाले स्मार्ट डिवाइस के लिए जुलाई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें “यंग साइंटिस्ट अवार्ड” से सम्मानित किया था।
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यूपी के खीरी के गौरिया गांव में एक गरीब परिवार में जन्मे मुनीर के लिए इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब वे महज एक साल के थे, तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया। उनके चार भाइयों और मां ने उनकी पढ़ाई के लिए बहुत मेहनत की। मुनीर ने अपने गांव के ही सरकारी प्राइमरी स्कूल से अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने एक प्राइवेट इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। वे बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में बहुत ही प्रतिभाशाली थे। अपनी इसी प्रतिभा के दम पर मुनीर ने भीमताल के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लायड साइंसेज़ में दाखिला लिया। यहां से उन्हें फेलोशिप मिली जिसके बाद उन्होंने फ्रांस और रूस जाकर इंटर्नशिप की जिससे एआई और सेंसर टेक्नोलॉजी में उनकी रुचि पैदा हुई।
(एजेंसी इनपुट के साथ)






