
सहपाठियों की पिटाई का विरोध जताते छात्र। इमेज-एआई
Maharana Pratap Engineering College News : कानपुर के मंधाना स्थित महाराणा प्रताप इंजीनियरिंग कॉलेज (MPEC) से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने शिक्षा के मंदिर को अखाड़ा बना दिया। बुधवार की सुबह जब कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण कुछ छात्र कॉलेज पहुंचने में चंद मिनट लेट हुए, तो अनुशासन सिखाने का जिम्मा उठाने वाले प्रोफेसर खुद अपना आपा खो बैठे। समझाने-बुझाने के बजाय शिक्षकों ने छात्रों पर लात-घूंसे और डंडे बरसाने शुरू कर दिए, जिससे कैंपस में कोहराम मच गया।
बुधवार सुबह कानपुर में विजिबिलिटी लगभग शून्य थी। इस प्राकृतिक बाधा की वजह से कई छात्र समय पर गेट नहीं पहुंच सके। जब छात्रों ने देरी का कारण बताया तो गेट पर तैनात प्रोफेसरों ने कथित तौर पर गाली-गलौज शुरू कर दी। छात्रों ने जब इस व्यवहार का विरोध किया तो बात मारपीट तक पहुंच गई। आरोप है कि तरुण और अभिषेक नाम के छात्रों को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। हद तो तब हो गई जब बीच-बचाव करने आई छात्राओं के साथ भी धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई।
प्रोफेसर की पिटाई से साथियों को लहूलुहान देख सैकड़ों छात्र आक्रोशित हो गए और कॉलेज के बाहर सड़क पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया। हंगामे की खबर मिलते ही बिठूर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और कंप्यूटर साइंस विभाग के सुभाष चंद्र मौर्य व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अनिल कुमार पाठक को निलंबित कर दिया। मामले की जांच के लिए एक इंटरनल कमेटी भी बनाई गई है।
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डीसीपी पश्चिम कासिम आबिदी के अनुसार विवाद के पीछे कॉलेज की नई एंट्री टाइमिंग भी एक बड़ी वजह थी। छात्र पहले से ही समय सीमा को लेकर असंतुष्ट थे और कोहरे के कारण हुई देरी ने आग में घी का काम किया। फिलहाल आरोपी शिक्षकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। कैंपस में तनाव को देखते हुए कक्षाएं रद्द कर दी गई हैं और सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल तैनात है। यह घटना सवाल खड़ा करती है कि क्या अनुशासन के नाम पर छात्रों के साथ ऐसा हिंसक व्यवहार जायज है?






