वो 'दो बड़े बारूद' जिनसे आधी रात JNU में मचा बवाल...उमर खालिद-शरजील इमाम के लिए लगे नारे, जानें वजह

JNU Slogans Against Modi-Shah: 5 जनवरी की रात को कैंपस में जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और वामपंथी संगठनों ने सरकार के खिलाफ विरोध किया. उनके प्रदर्शन में भड़काऊ नारे लगने का आरोप है।
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फाइल फोटो (Image- Social Media)
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JNU Campus Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर तनावपूर्ण माहौल में है। सोमवार 5 जनवरी की रात जेएनयू कैंपस में वही पुराना आक्रोश और तीखी तल्खी देखने को मिली। साबरमती हॉस्टल के बाहर भारी हंगामा हुआ। जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और वामपंथी संगठनों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। कैंपस में "न्याय दो" और "रिहाई दो" के नारे गूंजते रहे। दरअसल, ये नारे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और केंद्र सरकार के खिलाफ लगाए जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली दंगे के आरोप में जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई की मांग के लिए नारेबाजी की।

आधी रात JNU में क्यों मचा बवाल?

कल हुए इस उग्र प्रदर्शन के पीछे दो बड़े कारण थे, जिन्होंने कैंपस का माहौल गरमा दिया:

  • 1. 6 साल बाद भी आजाद हैं ‘नकाबपोश’- ठीक 6 साल पहले, 5 जनवरी 2020 की वह रात कोई नहीं भूल सकता, जब नकाबपोश गुंडों ने छात्रों और शिक्षकों पर लाठी-डंडों से हमला किया था। कल जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) और छात्र संघ ने इसे ‘क्रूर हमले’ की बरसी के रूप में याद किया। JNUSU के नेतृत्व में साबरमती हॉस्टल पर ‘गुरिल्ला ढाबा’ लगाकर अनोखा विरोध दर्ज कराया गया। छात्रों का सीधा सवाल सत्ता से था: 6 साल बीत गए, पुलिस और एजेंसियां उन नकाबपोश हमलावरों को अब तक क्यों नहीं पकड़ पाईं? आखिर उन्हें कौन बचा रहा है?
  • 2. उमर खालिद और शरजील इमाम पर ‘हल्ला बोल’-  माहौल तब और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब प्रदर्शन का रुख सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले की ओर मुड़ गया। कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली दंगा मामले में पूर्व JNU छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से नाराज छात्रों ने उनकी तुरंत रिहाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। JNUSU पदाधिकारियों का आरोप है कि यह छात्रों की आवाज को दबाने की साजिश है और वे इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक संघर्ष जारी रखेंगे।

कैंपस में ‘सर्विलांस’ का डर

इस आग में घी डालने का काम हालिया निगरानी विवाद ने किया। JNUSU महासचिव सुनील और संयुक्त सचिव दानिश समेत कई नेता लाइब्रेरी में फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली मशीन) लगाने का विरोध कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन कैंपस को जेल में बदल रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा कुछ छात्र नेताओं को भेजे गए नोटिस ने भी तनाव को बढ़ा दिया।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

कैंपस के अंदर माहौल गर्म है, लेकिन दिल्ली पुलिस के साउथ वेस्ट जिले के डीसीपी ने इसे सामान्य बताने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई औपचारिक शिकायत हमें प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि साबरमती हॉस्टल से आ रही तस्वीरें और वीडियो स्पष्ट रूप से दिखा रहे हैं कि जेएनयू में एक बार फिर बड़ा आंदोलन उभर रहा है।

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने कहा, “मैं कहूंगा कि यह विरोध और वोट बैंक पर आधारित M-factor सबसे बड़ी समस्या बन गई है। ये दंगे स्वाभाविक नहीं थे; ये प्रायोजित थे। ये दंगे अचानक नहीं हुए; ये संगठित थे।”

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