जन्मदिन विशेष: 70 के दशक की वो लड़की...जो बनना चाहती थी IAS, कैसे बन गई देश की सबसे शक्तिशाली महिला राजनेता?

Mayawati: चार बार के कार्यकाल के दौरान मायावती कई विवादों में रहीं, चाहे वह स्मारकों पर खर्च हो या विरोधियों के राजनीतिक आरोप। इन सबके बावजूद उनकी पकड़ अपने 'कैडर' वोट बैंक पर हमेशा मजबूत रही।
bsp chief mayawati 70th birthday
बसपा सुप्रीमो मायावती, ( डिजाइन फोटो/ नवभारत)
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BSP Chief Mayawati Birthday: भारतीय राजनीति में 'बहनजी' के नाम से मशहूर मायावती का व्यक्तित्व और राजनीतिक कद देश की दलित राजनीति की एक ऐसी धुरी है, जिसके इर्द-गिर्द उत्तर प्रदेश की सत्ता दशकों तक घूमती रही। 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के एक साधारण परिवार में जन्मी मायावती ने न केवल जातिगत रूढ़ियों को तोड़ा, बल्कि देश के सबसे बड़े राज्य की बागडोर चार बार संभालकर एक इतिहास रचा।

मायावती के पिता प्रभु दयाल डाक विभाग में काम करते थे। मायावती की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में हुई और उन्होंने कालिंदी कॉलेज से स्नातक (B.A.) करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी (L.L.B.) और बीएड (B.Ed.) की डिग्री हासिल की। राजनीति में आने से पहले वे दिल्ली के एक स्कूल में शिक्षिका थीं और साथ ही साथ प्रशासनिक सेवा (IAS) की तैयारी कर रही थीं।

कांशीराम से मुलाकात और राजनीति का उदय

1977 में दलित नेता कांशीराम के साथ हुई एक मुलाकात ने मायावती के जीवन की दिशा बदल दी। कांशीराम ने उनसे कहा था कि मैं तुम्हें इतना बड़ा नेता बनाऊंगा कि एक दिन तुम्हारे पीछे कई कलेक्टर (IAS) फाइलें लेकर दौड़ेंगे। 1984 में बहुजन समाज पार्टी के गठन के साथ ही मायावती सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनीं। मायावती के नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं।

सबसे युवा और पहली दलित महिला मुख्यमंत्री

साल 1995 में जब वे पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, तो वे राज्य की सबसे युवा और पहली दलित महिला मुख्यमंत्री थीं। इसके साथ ही मायावती ने 1995, 1997, 2002 और 2007 (पूर्ण बहुमत) में चार पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुकी हैं। 2007 के चुनाव में उन्होंने 'बहुजन' से 'सर्वजन' की ओर बढ़ते हुए दलित-ब्राह्मण गठजोड़ का एक सफल प्रयोग किया, जिसे आज भी राजनीति विज्ञान में पढ़ाया जाता है।

प्रशासनिक कड़ाई के लिए पहचान

मायावती को उनके सख्त प्रशासन और कानून-व्यवस्था के लिए 'आयरन लेडी' कहा जाता है। उनके शासनकाल में नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों का बुनियादी ढांचा तेजी से बदला और कई भव्य स्मारकों (जैसे अंबेडकर पार्क) का निर्माण हुआ।

मौजूदा दौर में मायावती को चुनौतियां

अपने चार बार के कार्यकाल के दौरान मायावती कई विवादों में भी रहीं, चाहे वह स्मारकों पर खर्च किया गया पैसा हो या विरोधियों के राजनीतिक आरोप। लेकिन, इन सबके बावजूद उनकी पकड़ अपने 'कैडर' वोट बैंक पर हमेशा मजबूत रही। आज भी बसपा का एक ऐसा वोट बैंक है जो मायावती के एक इशारे पर एकजुट हो जाता है।

बहुजन समाज का सबसे बड़ा चेहरा

वर्तमान में, भले ही चुनावी समीकरण बदल रहे हों, लेकिन मायावती का जन्मदिन (जिसे उनके अनुयायी 'जनकल्याणकारी दिवस' के रूप में मनाते हैं) आज भी भारतीय राजनीति की एक बड़ी घटना है। 70 साल की दहलीज पर खड़ी मायावती आज भी बहुजन समाज के लिए स्वाभिमान का सबसे बड़ा चेहरा हैं।

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