
2026 में आर्थिक तूफान की ओर पाकिस्तान, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान वर्ष 2026 में गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना कर सकता है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंच निक्केई एशिया में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर आर्थिक वृद्धि, लगातार हो रहे आतंकी हमले, राजनीतिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी संभावित आपदाएं देश की स्थिति को और जटिल बना रही हैं।
वरिष्ठ विश्लेषक फरहान बोखारी द्वारा लिखी गई रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने 2024 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 2027 तक के लिए मिले 7 अरब डॉलर के ऋण पैकेज के चलते फिलहाल विदेशी कर्ज पर डिफॉल्ट से तो बचाव कर लिया है लेकिन इससे उसकी दीर्घकालिक समस्याएं खत्म नहीं हुई हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि 2026 में पाकिस्तान के सामने कई गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां बनी रहेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर करीब 3 प्रतिशत है जो उसकी जनसंख्या वृद्धि दर से सिर्फ थोड़ा ही अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम ग्रोथ रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और जीवन स्तर में सुधार के लिए नाकाफी है। यही कारण है कि अर्थव्यवस्था को स्थिर और तेज गति देने के लिए कठोर आंतरिक सुधारों की जरूरत बताई गई है।
सामाजिक मोर्चे पर भी हालात चिंताजनक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की लगभग 25.7 करोड़ आबादी में से 40 प्रतिशत से अधिक लोग अत्यंत गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। इसके साथ ही देश में लगभग 40 प्रतिशत आबादी निरक्षर है जो मानव संसाधन विकास के लिहाज से बड़ा झटका माना जा रहा है।
निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान और अस्थिरता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है। खासकर लंबी अवधि के निवेशक तब तक सतर्क बने रहेंगे जब तक राजनीतिक संघर्ष और नीतिगत अनिश्चितता खत्म नहीं होती। नए पूंजी निवेश की कमी से पाकिस्तान के कम आर्थिक विकास के दुष्चक्र में फंसे रहने की आशंका जताई गई है।
जलवायु परिवर्तन पाकिस्तान के लिए एक और बड़ा खतरा बनकर उभरा है। हाल के वर्षों में देश भारी बारिश और भीषण बाढ़ से व्यापक तबाही झेल चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में सामान्य से लगभग 20 प्रतिशत अधिक बारिश होने की संभावना है, जिससे बाढ़ और कृषि नुकसान का जोखिम और बढ़ सकता है।
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स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी हालात गंभीर हैं। रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान में पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग एक-तिहाई बच्चे कुपोषण के कारण स्टंटिंग यानी अवरुद्ध शारीरिक विकास का शिकार हैं। लंबे समय तक तेज आर्थिक विकास न हो पाना और संपत्ति का असमान वितरण भी देश की प्रमुख संरचनात्मक समस्याओं में शामिल है।






