आज सूरज करेगा 'ओवरटाइम' ड्युटी (सौजन्यः सोशल मीडिया)
अकोला: “साल के 365 दिनों में कुछ दिन केवल तारीखें नहीं होते बल्कि वे वैज्ञानिक रहस्य, प्राकृतिक संतुलन और खगोलीय घटनाओं का अद्भुत संगम बनकर सामने आते हैं। उन्हीं में से एक है आज का दिन 21 जून। यह दिन सिर्फ कैलेंडर में दर्ज एक तारीख नहीं, बल्कि पृथ्वी और सूर्य के बीच के गहरे संबंध को समझने का अवसर है। यह है साल का वह क्षण है जब सूरज धरती पर सबसे अधिक समय तक अपनी रोशनी बिखेरता है।आज सूरज जैसे ‘ओवरटाइम’ कर रहा है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय लगभग 13 घंटे 19 मिनट तक फैला रहेगा, यानी दिन मानो थमने का नाम नहीं लेगा।
इसके विपरित रात मात्र 10 घंटे 41 मिनट की ही रह जाएगी। इस खगोलीय स्थिति को विज्ञान की दुनिया में कहा जाता है “ग्रीष्म संक्रांति” (Summer Solstice)। यह वह क्षण है जब सूरज सीधा कर्क रेखा पर होता है, और धरती के उत्तरी गोलार्ध को सबसे ज्यादा रोशनी मिलती है। प्रकृति का यह अद्भुत संतुलन ना केवल मौसम को आकार देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पृथ्वी और ब्रह्मांड के नियम कितने गहरे और व्यवस्थित हैं। आज का दिन केवल उजाले का पर्व है, बल्कि विज्ञान से जुड़ने, प्रकृति को समझने और आसमान की ओर एक बार फिर देखने का निमंत्रण भी है।
खगोल विशेषज्ञ प्रभाकर दोड ने बताया कि हर साल 21 जून को सूरज सीधा कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर आता है। यह वह काल होता है जब सूर्य का प्रकाश उत्तरी गोलार्ध पर सबसे अधिक और सीधा पड़ता है। इस दिन से ही सूर्य दक्षिणायन में प्रवेश करता है यानी अब उसकी किरणें धीरे-धीरे दक्षिण की ओर खिसकने लगेंगी। इस खगोलीय बदलाव का असर दिन-रात की लंबाई से लेकर मौसम तक पर पड़ता है।
पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री के झुकाव पर घूमती है। यही झुकाव दिन और रात की लंबाई को तय करता है। जब धरती का उत्तरी हिस्सा सूरज की ओर झुका होता है, तब वहां ज्यादा रोशनी मिलती है और यही वजह है कि मार्च से सितंबर तक उत्तरी गोलार्ध में गर्मी और लंबे दिन रहते हैं।21 जून को यह झुकाव अपने चरम पर होता है, जिससे भारत जैसे देशों में दिन सबसे बड़ा और रात सबसे छोटी होती है। इसके विपरीत, 22 दिसंबर को सूर्य मकर रेखा पर होता है, और तब दक्षिणी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है।
खगोलशास्त्रियों के अनुसार, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिन की लंबाई इस संक्रांति के दिन भिन्न-भिन्न होती है। उत्तरी ध्रुव पर तो यह पूरा छह महीने का दिन होता है और आज का समय वहां के इस लंबे दिन का मध्यकाल है। वहीं, कर्क रेखा के आसपास के क्षेत्रों में दिन लगभग 13 घंटे 30 मिनट तक फैला होता है। अगर बात विषुव रेखा यानी भूमध्य रेखा की करें, तो वहां दिन और रात बराबर, यानी 12-12 घंटे के होते हैं। लेकिन भारत जैसे देशों, जो कर्क रेखा के नजदीक स्थित हैं, वहां आज दिन करीब 13 घंटे 19 मिनट लंबा है, जबकि रात मात्र 10 घंटे 41 मिनट की रह जाती है। इस खगोलीय बदलाव को समझना और अनुभव करना, हमें इस बात का बोध कराता है कि कैसे पृथ्वी का झुकाव और उसकी गति हमारे रोज़मर्रा के जीवन पर गहरा असर डालती है।
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आज का दिन केवल सूरज की उपस्थिति के लिए खास नहीं है, बल्कि रात का आसमान भी असाधारण रहने वाला है। प्रभाकर दोड के मुताबिक, मॉनसून के कारण वायुमंडल में धूलकण कम हो गए हैं, जिससे आसमान बेहद साफ नजर आएगा और ग्रह-तारे भी बिना किसी यंत्र के देखे जा सकेंगे। शाम को पश्चिम दिशा में आप बुध और मंगल ग्रह को देख सकते हैं। भोर में पूर्व दिशा में शुक्र और शनि ग्रह अपनी चमक के साथ दिखाई देंगे। इस तरह के संयोग खगोल प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक और देखने लायक होते हैं।
प्रभाकर दोड का मानना है कि इस दिन को सिर्फ एक सामान्य तारीख के रूप में न देखकर इसे खगोल विज्ञान और पर्यावरणीय चेतना से जोड़कर देखना चाहिए। उन्होंने कहा “जब हम जानते हैं कि पृथ्वी किस तरह से सूर्य की परिक्रमा करती है, कैसे उसका झुकाव हमारे दिन-रात और मौसम तय करता है। तो हम प्रकृति के साथ और भी गहराई से जुड़ पाते हैं।”विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और युवाओं को इस तरह की खगोलीय घटनाओं की जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे विज्ञान को सिर्फ किताबों से नहीं, आसमान और जीवन से भी सीख सकें। 21 जून हमें यह या दिलाता है कि प्रकृति का हर नियम, हर घटना, किसी बड़े विज्ञान का हिस्सा है।
दिन का बड़ा होना सिर्फ समय का सवाल नहीं, यह धरती, सूर्य और ब्रह्मांड के बीच के रिश्ते का प्रमाण है।आज का दिन सिर्फ सूरज को सलाम करने का नहीं, बल्कि आसमान को देखने और विज्ञान को समझने का दिन है। तो आज शाम, एक बार आसमान की ओर ज़रूर देखें, शायद कोई ग्रह आपको चुपके से मुस्कुरा रहा हो!