एक आदेश और पूरा इलाका ऑफलाइन! सरकार मिनटों में इंटरनेट कैसे बंद कर देती है?

Internet Shutdown: इंटरनेट केवल वीडियो देखने या सोशल मीडिया चलाने तक सीमित नहीं रह गया है। बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, पढ़ाई, ऑफिस वर्क और आपात सेवाएं सब कुछ इंटरनेट पर टिका है।
One order and the entire area goes offline! How does the government shut down the internet in minutes?
Internet Shutdown (Source. Freepik)
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Internet Shutdown India: आज के समय में इंटरनेट केवल वीडियो देखने या सोशल मीडिया चलाने तक सीमित नहीं रह गया है। बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, पढ़ाई, ऑफिस वर्क और आपात सेवाएं सब कुछ इंटरनेट पर टिका है। ऐसे में जब अचानक किसी राज्य या पूरे इलाके में इंटरनेट बंद हो जाता है, तो आम लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर सरकारें इतनी आसानी से इंटरनेट कनेक्टिविटी कैसे रोक देती हैं? असल में इसके पीछे तकनीकी सिस्टम और कानूनी अधिकार दोनों काम करते हैं।

इंटरनेट शटडाउन का सबसे आसान और आम तरीका

इंटरनेट बंद करने का सबसे सामान्य तरीका है टेलीकॉम कंपनियों को सीधा आदेश देना। देश में काम कर रही सभी मोबाइल और ब्रॉडबैंड कंपनियां सरकारी निर्देशों के तहत सेवाएं देती हैं। जैसे ही सरकार से आदेश मिलता है, कंपनियां कुछ ही मिनटों में मोबाइल डेटा, ब्रॉडबैंड या फाइबर इंटरनेट को बंद कर देती हैं। इसी वजह से अचानक पूरा नेटवर्क ठप नजर आने लगता है।

DNS और IP ब्लॉकिंग से वेबसाइट कैसे रोकी जाती हैं?

हर बार पूरा इंटरनेट बंद करना जरूरी नहीं होता। कई बार सरकारें सिर्फ कुछ वेबसाइट्स, ऐप्स या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करती हैं। इसके लिए DNS ब्लॉकिंग और IP ब्लॉकिंग का इस्तेमाल किया जाता है। जब यूजर किसी साइट को खोलने की कोशिश करता है, तो उसका रिक्वेस्ट ही सर्वर तक नहीं पहुंच पाता। अक्सर व्हाट्सऐप, फेसबुक, X या न्यूज वेबसाइट्स इसी तरीके से रोकी जाती हैं।

इंटरनेट बंद, लेकिन कॉल और SMS क्यों चलते रहते हैं?

कई लोगों ने नोटिस किया होगा कि इंटरनेट तो बंद होता है, लेकिन कॉलिंग और SMS सेवाएं चालू रहती हैं। इसकी वजह यह है कि मोबाइल नेटवर्क में वॉइस कॉल और डेटा अलग-अलग सिस्टम पर काम करते हैं। सरकार जरूरत पड़ने पर सिर्फ डेटा सेवाएं बंद करवाती है, ताकि अफवाहें और ऑनलाइन गतिविधियां रोकी जा सकें, लेकिन जरूरी बातचीत जारी रहे।

इंटरनेशनल गेटवे और अंडरसी केबल का कंट्रोल

कुछ देशों में सरकारें इंटरनेशनल इंटरनेट गेटवे को भी नियंत्रित करती हैं। अंडरसी केबल और गेटवे के जरिए ही देश को ग्लोबल इंटरनेट मिलता है। अगर इन गेटवे पर रोक लगा दी जाए, तो देश का बाहरी इंटरनेट कनेक्शन लगभग पूरी तरह कट सकता है और पूरा इलाका ऑफलाइन हो जाता है।

कानून और सुरक्षा के नाम पर इंटरनेट बंदी

अक्सर इंटरनेट शटडाउन कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात हालात के नाम पर किया जाता है। सरकारों का मानना है कि दंगे, विरोध प्रदर्शन या तनावपूर्ण स्थिति में इंटरनेट अफवाह फैलाने का सबसे तेज जरिया बन सकता है।

आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर

इंटरनेट बंद होने से UPI पेमेंट, ऑनलाइन काम, पढ़ाई और छोटे कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में इंटरनेट शटडाउन आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

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