AI से बदलेगा कामकाज का तरीका, टेक कंपनियों में बढ़ रही छंटनी की रफ्तार

टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। इस बदलाव की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को माना जा रहा है। कंपनियों अपने कई काम अब AI से करा रहे है।
AI से बदलेगा कामकाज का तरीका, टेक कंपनियों में बढ़ रही छंटनी की रफ्तार
AI से कंपनी की Jobs पर हो रहा असर (सौ. Freepik)
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मुनाफे के बावजूद टेक कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। इस बदलाव की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को माना जा रहा है। कंपनियों का कहना है कि अब कई काम ऐसे हैं जो इंसानों के बजाय मशीन और AI से अधिक तेजी व सटीकता से पूरे हो रहे हैं। इसके चलते कर्मचारियों की जरूरत कम होती जा रही है।

छंटनी की शृंखला में दिग्गज कंपनियां भी शामिल

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा और डुओलिंगो जैसी दिग्गज टेक कंपनियां AI के कारण अपने कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती कर रही हैं।

  • गूगल ने 2023 से अब तक 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है।
  • मेटा ने फरवरी 2024 में अपने 5% स्टाफ को नौकरी से हटा दिया।
  • माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और डुओलिंगो भी इस लिस्ट में शामिल हैं।

AI से हर चौथी नौकरी पर असर

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन और पोलैंड के नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्टडी के मुताबिक, दुनिया में हर चार में से एक नौकरी जनरेटिव AI से प्रभावित हो रही है। वहीं, विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट कहती है कि इस दशक में जहां 17 करोड़ नई नौकरियां आएंगी, वहीं 9.2 करोड़ नौकरियां खत्म हो जाएंगी।

विशेषज्ञों की चेतावनी: वाइट कॉलर जॉब्स खतरे में

एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो एमोडेई का कहना है, “AI से वाइट कॉलर जॉब्स आधी हो सकती हैं और पांच साल में बेरोजगारी 20% तक बढ़ सकती है।”

  • जेफ्री हिंटन ने भी AI से बड़ी संख्या में जॉब्स खत्म होने की संभावना जताई है।
  • माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला के अनुसार, “AI पर फोकस की वजह से छंटनी हो रही है।”
  • सुंदर पिचाई का मानना है, “छंटनी से कामकाज बेहतर हुआ है।”
  • इनमोबी के सीईओ नवीन तिवारी ने कहा, “2025 तक 80% कोडिंग का काम मशीनें करेंगी।”
  • एनविडिया के सीईओ ने कहा, “काम करने का तरीका बदलने वाला है।”

महज AI नहीं, कई और वजहें भी

टेक इंडस्ट्री में यह ट्रेंड केवल AI की वजह से नहीं है। महामारी के बाद अधिक भर्ती करने के कारण कंपनियों को फिर से स्ट्रक्चर तय करना पड़ा।

  • 2022 में करीब 2.63 लाख नौकरियां गईं।
  • 2023 की पहली तिमाही में 1.67 लाख कर्मचारियों को निकाला गया।
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