AI से प्यार बना रिश्तों में दरार! बढ़ते तलाक और कानून की नई चुनौती

AI In Relationship: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल कामकाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह लोगों की निजी जिंदगी में भी गहराई से प्रवेश कर चुका है। बीते कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
AI-driven romance is causing rifts in relationships! Leading to rising divorce rates and new legal challenges.
AI in Relationship (Source. Freepik)
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Impact of AI on Relationships: तकनीक के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल कामकाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह लोगों की निजी जिंदगी में भी गहराई से प्रवेश कर चुका है। बीते कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोग AI चैटबॉट्स से भावनात्मक रूप से जुड़ गए। जापान में तो एक महिला द्वारा AI कैरेक्टर से शादी करने का मामला भी दुनिया भर में चर्चा का विषय बना। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मशीनों से बढ़ता यह लगाव इंसानी रिश्तों के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है।

इंसानी रिश्तों पर AI का असर

जानकारों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपने पार्टनर की बजाय AI से ज्यादा बातचीत करने लगता है, अपनी भावनाएं साझा करता है और मानसिक सहारा खोजता है, तो असली रिश्ते कमजोर पड़ने लगते हैं। यही कारण है कि कई शादियां तनाव में आ रही हैं और तलाक के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि AI से इमोशनल अटैचमेंट लंबे समय में रिश्तों को खोखला कर सकता है।

AI से जुड़ाव को चीटिंग मानते हैं लोग

एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि करीब 60 प्रतिशत सिंगल एडल्ट्स का मानना है कि AI के साथ रिलेशनशिप रखना भी चीटिंग की श्रेणी में आता है। वहीं फैमिली लॉ से जुड़े वकीलों का कहना है कि तलाक की अर्जियों में अब यह बात अक्सर दर्ज की जा रही है कि पार्टनर AI से जरूरत से ज्यादा जुड़ा हुआ है या अपनी हर निजी बात मशीन के साथ साझा करता है। इसे रिश्ते में विश्वासघात के रूप में देखा जा रहा है।

कानून की नजर में AI पार्टनर

इन मामलों को देखते हुए कई देशों में कानूनी ढांचे पर पुनर्विचार शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि AI पार्टनर को केवल एक सॉफ्टवेयर मानने के बजाय रिलेशनशिप में ‘थर्ड पार्टी’ के तौर पर देखा जाए। कानूनी जानकारों की मांग है कि AI से जुड़े रिश्तों को लेकर स्पष्ट कानून बनाए जाएं, ताकि भविष्य में बढ़ते विवादों को संभाला जा सके।

AI पार्टनर से जुड़ी बढ़ती समस्याएं

AI एजेंट्स अब बेहद सुलभ हो चुके हैं और यही वजह है कि परिवारों में टकराव बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई तलाक मामलों में यह सामने आया है कि एक पार्टनर मशीन से ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़ा है। इसका असर आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। कई लोग शिकायत कर रहे हैं कि उनके पार्टनर AI सब्सक्रिप्शन पर भारी रकम खर्च कर रहे हैं। इसके अलावा AI के साथ निजी और संवेदनशील जानकारी साझा करना भी एक गंभीर चिंता बन गया है।

मिसकंडक्ट और तलाक का आधार

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि AI के साथ अत्यधिक भावनात्मक जुड़ाव और निजी डेटा साझा करना 'मिसकंडक्ट' के दायरे में आ सकता है। ऐसे मामलों को तलाक के दौरान सबूत के रूप में भी पेश किया जा सकता है। साफ है कि तकनीक के इस नए रूप ने रिश्तों और कानून दोनों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

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