कम नहीं हो रही अनिल अंबानी की मुश्किलें, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिया झटका, 'फ्रॉड' कार्रवाई पर लगा स्टे हटाया

Anil Ambani Bank Fraud Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी को मिली अंतरिम राहत रद्द कर दी है। अब बैंक उनके खातों को 'फ्रॉड' घोषित करने की प्रक्रिया फिर से शुरू कर सकेंगे।
Bombay High Court lifts stay on 'fraud' proceedings against Anil Ambani's bank accounts
अनिल अंबानी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Bombay High Court On Anil Ambani: उद्योगपति अनिल अंबानी के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बार फिर बुरी खबर आई है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उस अंतरिम राहत को रद्द कर दिया है, जिसने बैंकों को अंबानी के खिलाफ 'फ्रॉड' (धोखाधड़ी) की कार्रवाई करने से रोक रखा था। अदालत के इस रुख के बाद अब बैंकों के लिए उनके खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में डालने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद उन 'कारण बताओ' नोटिसों से शुरू हुआ था, जो भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी की कंपनियों को जारी किए थे। ऑडिट रिपोर्ट में मिली खामियों के आधार पर बैंकों ने उनके खातों को 'फ्रॉड' घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद दिसंबर 2025 में सिंगल बेंच ने बैंकों की इस कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

कोर्ट ने क्यों बदला फैसला?

ताजा सुनवाई में बॉम्बे हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के पुराने आदेश को 'कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण' करार दिया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि यदि कोई आदेश प्रथम दृष्टया गलत पाया गया है, तो उसे अधिक समय तक जारी रखना न्यायसंगत नहीं होगा। अंबानी के वकीलों ने फैसले पर चार हफ्ते की रोक लगाने की मांग की थी ताकि वे ऊपरी अदालत में अपील कर सकें, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मांग को भी सिरे से खारिज कर दिया।

प्राकृतिक न्याय और RBI के नियम

अनिल अंबानी की मुख्य दलील यह थी कि बैंकों की कार्रवाई में 'प्राकृतिक न्याय' के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। हालांकि, RBI ने 2024 में अपने मास्टर सर्कुलर में संशोधन कर यह स्पष्ट किया था कि किसी भी खाते को 'फ्रॉड' घोषित करने से पहले संबंधित पक्ष को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। लेकिन मौजूदा मामले में कोर्ट ने तकनीकी आधारों और ऑडिट रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए राहत जारी रखने से इनकार कर दिया।

बैंकों के पास अब क्या विकल्प हैं?

अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत अन्य संबंधित बैंक और ऑडिट फर्में फिर से प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं। यदि खाते आधिकारिक तौर पर 'फ्रॉड' घोषित हो जाते हैं, तो अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के लिए भविष्य में बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाना और भी कठिन हो जाएगा।

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