

हैदराबाद: भारत के पूर्व तेज गेंदबाज वरुण आरोन को एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। सनराइजर्स हैदराबाद ने वरुण आरोन को गेंदबाजी कोच नियुक्त किया है। आईपीएल 2026 के पहले ही सनराइजर्स हैदराबाद ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। आरोन न्यूजीलैंड के पूर्व बाएं हाथ के तेज गेंदबाज जेम्स फ्रैंकलिन की जगह लेंगे।
सनराइजर्स हैदराबाद ने अपने एक्स अकाउंट पर ट्वीट करते हुए बताया कि वरुण आरोन इस टीम के नए सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि हमारे कोचिंग स्टाफ में एक शानदार सदस्य! हमारे नए गेंदबाजी कोच के रूप में वरुण आरोन का स्वागत है। आरोन ने 2011 से 2015 के बीच भारत के लिए नौ टेस्ट और 9 वनडे मैच खेले हैं। आरोन ने अपना आखिरी प्रतिस्पर्धी मैच इसी साल पांच जनवरी को जयपुर में गोवा के खिलाफ झारखंड के लिए विजय हजारे ट्रॉफी का खेल था।
झारखंड के इस 50 ओवर के घरेलू टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में पहुंचने में विफल रहने पर उन्होंने संन्यास की घोषणा कर दी थी। उन्होंने पिछले साल चेन्नई में एमआरएफ पेस फाउंडेशन में आस्ट्रेलिया के दिग्गज ग्लेन मैकग्राथ के साथ एक कोच के रूप में कुछ समय के लिए काम किया था।
आरोन करियर की शुरुआत में एक युवा तेज गेंदबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई थी जो 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार को पार करने में सक्षम था। भारतीय क्रिकेट के शीर्ष अधिकारियों ने उस समय आरोन और उभरते हुए एक अन्य तेज गेंदबाज उमेश यादव पर बहुत अधिक ध्यान दिया था। उमेश ने देश के लिए 50 से अधिक टेस्ट खेले तो वहीं लगातार चोटिल होने के कारण आरोन का करियर ज्यादा लंबा नहीं हो सका। आरोन ने संन्यास के बाद टेलीविजन पर क्रिकेट विशेषज्ञ के तौर पर काम करना शुरू किया है।
सनराइजर्स हैदराबाद का आईपीएल 2025 का अभियान काफी हद तक निराशाजनक रहा। टीम ने हालांकि अपने पहले मैच में 286 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर एक शानदार शुरुआत की थी, लेकिन पूरे सीज़न में वह उस लय को बरकरार नहीं रख पाई। प्रदर्शन में निरंतरता की कमी, शीर्ष क्रम पर अत्यधिक निर्भरता और मध्य क्रम की विफलता उनकी सबसे बड़ी कमजोरियां रहीं।
2024 में शानदार फॉर्म में नजर आई ट्रेविस हेड और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी इस बार वैसा असर छोड़ने में नाकाम रही। जब भी टीम को उनसे मजबूत शुरुआत की जरूरत थी, वे दबाव में बिखर गए। इसके अलावा, ईशान किशन, हेनरिक क्लासेन और नितीश रेड्डी जैसे बल्लेबाज भी मध्य क्रम में स्थिरता और आक्रामकता का संतुलन कायम नहीं रख सके। कई बार वे अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में तब्दील करने में चूके और टीम को जीत दिलाने में असफल रहे।