
अहंकारी ट्रंप (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: हैरानी की बात यह है कि ट्रंप बार-बार अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कूटनीतिक गलियारे में ये व्यंग्यभरी टिप्पणियां करते हुए हर बार प्रधानमंत्री मोदी को अपना खास दोस्त बताना भी नहीं भूलते, जैसे वो जानबूझकर व्यंग्य कर रहे हों। उनके इस सनकभरे व्यवहार का मतलब क्या है? डोनाल्ड ट्रंप अपने इस अंदाज के जरिए दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि वह किस तरह भारत से बहुत ऊपर पोजीशन में हैं और सामने वाले को याचक के रूप में पेश कर रहे हैं। राजनीति में लोग दुश्मनों के लिए भी इस तरह की भाषा बोलने से परहेज रखते हैं। फिर ट्रंप तो प्रधानमंत्री मोदी को बार-बार अपना दोस्त बताते हैं, फिर इस तरह अपमान करने की कोशिश क्यों करते हैं? दरअसल ट्रंप दिखानाचाहते हैं कि उनके पास ताकत है और मिलने की जरूरत उन्हें नहीं, बल्कि सामने वाले को है। यह एक कूटनीतिक हमला और हमारा अपमान है।
डोनाल्ड ट्रंप षड्यंत्रकारी तरीके से हमें निशाना बनाकर पूरी दुनिया को संदेश देना चाहते हैं कि अगर वो भारत जैसी दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही अर्थव्यवस्था और कुशल मानव संसाधन के सबसे बड़े वैश्विक हब को कुछ नहीं समझते, तो दुनिया में बाकी देशों की क्या बिसात है? वेनेजुएला प्रकरण के बाद जिस तरह से अमेरिकी संसद दो खेमों में बंट गई है और ब्रिटेन को छोड़कर लगभग पूरे यूरोप ने ट्रंप के खिलाफ बयानबाजी की है, उससे ट्रंप हिल गए हैं। उन्होंने वेनेजुएला में जो साम्राज्यवादी हरकत चीन को दहशत में लाने और रूस की अनदेखी करने के लिए की, उससे रूस और चीन तो ज्यादा घबराए नहीं उल्टे यूरोप उनका साथ छोड़ने की स्थिति में आ गया है। आज अगर भारत को अमेरिका से टैरिफ न बढ़ाए जाने की चाहत है तो हमें नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका को भी भारत से बहुत सारी चीजें चाहिए।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसे भारत का विशाल बाजार चाहिए, जहां वह अपनी पूंजी ब्लगा सके और उससे बेहतर रिटर्न हासिल कर सके। दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि जिस तरह से ट्रंप जाने-अनजाने रूस और चीन को अपना खुलेआम दुश्मन बना रहे हैं, उसमें अगर भारत भी उनके साथ न हुआ तो अमेरिका न केवल ग्लोबल मोर्चे में अलग-थलग पड़ जाएगा, बल्कि ग्लोबल साउथ से उसकी सारी उम्मीदें धरी की धरी रह जाएंगी। भारत इस समय अमेरिका के लिए एकमात्र ऐसा सहयोगी हो सकता है, जो अमेरिका को रूस और चीन की साझी नाराजगी की भरपाई कर सके। क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा तेज रफ्तार से बढ़ रही है और भारत में कुशल मानव संसाधनों का जखीरा है।
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इस एआई के तूफानी दिनों में वही है जो भविष्य की अर्थव्यवस्था को एक स्थिरता और निरंतरता की दिशा दे सकता है। लेकिन जिस तरह से ट्रंप बार-बार भारत का और प्रधानमंत्री मोदी का अपमान कर रहे हैं, उससे लगता है कि वह जरा भी दूरदर्शी सोच नहीं रखते। जब वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुझसे कहा कि सर क्या मैं आपसे मिल सकता हूं, तो वह यह भूल जाते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी कोई उनके दरवाजे पर नहीं खड़े थे, जो अंदर आने की उनसे इजाजत मांग रहे हों। दरअसल ट्रंप का यह जहरीला मनोविज्ञान है जिसके प्रभाव में वह इस तरह के शब्दों का चयन करके हमें मनोवैज्ञानिक ढंग से नीचा दिखाना चाहते हैं।
लेख- वीना गौतम के द्वारा






