न पेट्रोल, न गैस... फिर किस ‘काले सोने’ पर टूट पड़े हैं US-चीन-रूस? जानें वेनेजुएला का असली सच

Venezuela Oil Reserves: वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। लेकिन यहां ऐसा और क्या है जिसको लेकर अमेरिका ने इसे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का मुख्य केंद्र बना दिया है।
No petrol, no gas... then what "black gold" are the US, China, and Russia fighting over? Learn the real truth about Venezuela.
वेनेजुएला के क्रूड ऑयल को लेकर परेशान महाशक्तियां, (डिजाइन फोटो)
Published on
Updated on

Which Type Crude Oil In Venezuela: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर हालिया अमेरिकी कार्रवाई ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक होने के बावजूद अमेरिका की नजरें वेनेजुएला के 'खास' तेल पर टिकी रहती हैं। यह केवल राजनीति नहीं बल्कि तेल की एक जटिल रासायनिक और आर्थिक कहानी है।

आमतौर पर माना जाता है कि कच्चा तेल एक जैसा ही होता है लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। तेल की गुणवत्ता का आकलन उसकी API ग्रेविटी और सल्फर की मात्रा से किया जाता है।

कैसा होता है कच्चा तेल?

हल्का कच्चा तेल अपेक्षाकृत पतला होता है और रिफाइनिंग में आसान माना जाता है जिससे पेट्रोल और विमान ईंधन जैसी उच्च मूल्य की चीजें ज्यादा निकलती हैं। इसके उलट, वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और एक्स्ट्रा-हैवी श्रेणी में आता है। कई मामलों में इसकी API ग्रेविटी 10 से भी कम होती है, जिससे यह इतना गाढ़ा हो जाता है कि इसे जमीन से निकालना और बहाना भी मुश्किल हो जाता है।

ऊर्जा का विशाल भंडार

वेनेजुएला की असली ताकत उसकी ओरिनोको ऑयल बेल्ट में छिपी है जिसे दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां लगभग 303 अरब बैरल का प्रमाणित तेल भंडार मौजूद है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा है। यह संसाधन आने वाले कई दशकों तक दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है।

हालांकि, इस अत्यधिक गाढ़े तेल को निकालना और उसे उपयोग योग्य ईंधन में बदलना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक और महंगे अपग्रेडिंग प्लांट्स की जरूरत होती है, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है।

Understand Venezuelan crude oil
वेनेजुएला के क्रूड ऑयल के बारे में समझें

वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की मजबूरी

अब यह सवाल अक्सर उठता है कि जब अमेरिका खुद रिकॉर्ड स्तर पर तेल उत्पादन कर रहा है, तो उसे वेनेजुएला के तेल में दिलचस्पी क्यों है? इसका जवाब अमेरिकी रिफाइनरियों की संरचना में छिपा है। अमेरिका की गल्फ कोस्ट स्थित लगभग 70 प्रतिशत रिफाइनरियां भारी और सॉर क्रूड को प्रोसेस करने के हिसाब से डिजाइन की गई हैं। शेल ऑयल क्रांति के बाद भले ही अमेरिका में हल्के तेल की भरमार हो गई हो, लेकिन उसकी रिफाइनरियां अब भी भारी तेल पर निर्भर हैं। वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगने के बाद अमेरिकी कंपनियों को कनाडा और मेक्सिको से महंगे दामों पर तेल खरीदना पड़ा।

PDVSA की बदहाली और प्रतिबंधों का साया

वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA कभी दुनिया की सबसे ताकतवर कंपनियों में शामिल थी, लेकिन 2007 में हुए राष्ट्रीयकरण और लंबे समय तक निवेश की कमी ने इसकी हालत खराब कर दी। इसके बाद 2019 में लगाए गए कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों ने हालात और बिगाड़ दिए।

तकनीक और अंतरराष्ट्रीय वित्त तक पहुंच बंद होने से उत्पादन 30 लाख बैरल प्रतिदिन से गिरकर 10 लाख बैरल से भी नीचे आ गया। 2023 में अमेरिकी कंपनी शेवरॉन को सीमित छूट मिलने से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन 2025 में दोबारा सख्त हुए प्रतिबंधों के कारण वैश्विक बाजार में डीजल और फ्यूल ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा फिर से गहराने लगा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com