
तिरुपति लड्डू घोटाला आस्था से खिलवाड़ (सौ. डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: मुनाफे के अंधे लालच में पशु चर्बी व रासायनिक पदार्थों से बने नकली घी का प्रसाद खिलानेवालों का अपराध अक्षम्य है। लोग बड़े श्रद्धाभाव से तिरुपति बालाजी देवस्थानम का लड्डू प्रसाद खाते है और अपने साथ परिजनों व मित्रों के लिए ले जाते हैं। उन्हें इस तरह के मिलावटी घी का प्रसाद देकर उनकी आस्था और धार्मिक विश्वास पर गहरा आघात किया जाता रहा। शाकाहारी व्यक्ति कैसे बर्दाश्त करेगा कि उसे प्रसाद में पशु चर्बी वाला लड्डू दिया गया। प्रसाद की कीमत देने के बाद भी यदि इस तरह धर्म भ्रष्ट करने की करतूत होती है तो इसे कैसे बर्दाश्त किया जाएगा? 5 वर्षों तक यह नीचतापूर्ण सिलसिला चलता रहा।
तिरुपति बालाजी मंदिर भारत का सबसे संपन्न धर्मस्थान है जहां लाखों-करोड़ों का चढ़ावा आता है। इस पर भी वहां प्रसाद बेचा जाता है। लोग टोकन खरीदकर काउंटर से लड्डू हासिल करते हैं। हर भक्त मानता है कि यह लड्डू शुद्ध घी से ही बना होगा। किसी के मन में शंका होने का सवाल ही नहीं उठता। लोग श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करते हैं। घर पहुंचने के बाद जिसे लड्डू देते हैं वह भी इसे पाकर स्वयं को धन्य महसूस करता है। अब सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड के भगवानपुर स्थित भोलेबाबा आर्गेनिक डेयरी से पूरे 5 वर्षों तक तिरूपति बालाजी मंदिर को 68 लाख किलो नकली घी की सप्लाई की गई जिसकी कीमत करीब 250 करोड़ रुपए आंकी जाती है।
2019 से 2024 तक इस नकली घी को बेचनेवाली डेयरी के संचालक पोमिल जैन और विपिन जैन थे। क्या कट्टर शाकाहारी जैन देश के कोने-कोने से आनेवाले बालाजी के भक्तों को ऐसा घी खिलाएंगे, इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। जो लोग प्याज-लहसुन तक नहीं खाते उन्हें पशु चर्बी वाले नकली घी के लड्डू खिलाना महापाप नहीं तो और क्या है? इस डेयरी ने कभी दूध या मक्खन की खरीदारी नहीं की बल्कि रासायनिक पदार्थों जैसे मोनो डाईग्लिसराइड, एसिटिक एसिड एस्टर व एनिमल फैट से कृत्रिम घी तैयार किया। अपराधी इतने शातिर थे कि उन्होंने दूध खरीद के झूठे रिकार्ड तैयार किए जब 2022 में भोलेबाबा डेयरी को ब्लैक लिस्ट किया गया तो इन लोगों ने दूसरी कंपनियों के नाम पर नकली घी की सप्लाई जारी रखी।
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जुलाई 2023 में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने भोलेबाबा डेयरी के पशु चर्बी की मिलावट वाले घी के 4 टैंकर रिजेक्ट कर दिए तो उन्होंने दूसरी डेयरी के नाम से लेबल बदलकर वही घी तिरूपति मंदिर को फिर सप्लाई कर दिया जिसका लड्डू प्रसाद में उपयोग किया गया। सीबीआई अब यह भी जांच कर रही है कि टीटीडी के किन अधिकारियों की मिलीभगत इस नकली घी घोटाले में थी।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






