
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
नवभारत डिजिटल डेस्क: हापालिका चुनाव के बाद अब सत्ता के लिए होड़ लगी है। जिन महापालिकाओं में एक ही पार्टी ने बहुमत पा लिया है वहां विवाद नहीं है परंतु जहां 2 या उससे अधिक पार्टियों की युति या आघाड़ी ने बहुमत हासिल किया है वहां संभ्रम की स्थिति बनी हुई है। जहां किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिल पाया वहां भी ऐसी ही हालत है।
मुंबई में बीजेपी-शिंदे गुट की युति ने बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया। शिंदे सेना की तुलना में बीजेपी के 3 गुने नगरसेवक चुने गए परंतु अभी तक स्पष्ट नहीं कि महापौर किसका बनेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अभी दावोस के दौरे पर हैं। उनके वापस आने के बाद ही महापौर चुनाव प्रक्रिया को गति मिलेगी। हैरत की बात है कि उद्धव ठाकरे ने कहा कि ईश्वर की इच्छा होगी तो शिवसेना का ही मेयर बनेगा।
यदि 22 जनवरी को महापौर आरक्षण की लॉटरी में मुंबई का महापौर अनुसूचित जमाति के लिए रिजर्व हो गया तो महायुति के लिए समस्या हो जाएगी क्योंकि इस वर्ग का कोई भी उम्मीदवार बीजेपी या शिंदे सेना में विजयी नहीं हुआ है। इस वर्ग के प्रत्याशी उद्धव ठाकरे की शिवसेना में जीते हैं। शायद इसीलिए उद्धव ने इसे ईश्वर की इच्छा कहा है। यदि आरक्षण लॉटरी अन्य वर्ग की निकली तो महापौर महायुति का ही होगा।
एकनाथ शिंदे ने ढाई वर्ष के लिए मेयर पद की मांग रखी है लेकिन बीजेपी को यह स्वीकार्य नहीं है। दिल्ली ने शिंदे की शर्त ठुकरा दी है। कल्याण-डोंबिवली व नवी मुबई में विवाद की स्थिति है। कल्याण-डोंबिवली में बीजेपी और शिंदे सेना के बीच केवल 3 नगरसेवकों का अंतर है। वहां उद्धव सेना के 10 और मनसे के 5 ऐसे 15 नगरसेवक चुन कर आए हैं। उन्हें अपनी ओर खींचने की बीजेपी और शिंदे सेना में होड़ लगी है।
चंद्रपुर में उद्धव सेना ने कहा है कि हमें जो महापौर पद देगा, उसके साथ जाएंगे। दूसरी ओर मुनगंटीवार ने कहा कि कांग्रेस के कुछ नगरसेवक बीजेपी के संपर्क में हैं। अमरावती में बीजेपी के सामने प्रश्न है कि किसका सहयोग लें। अकोला में बीजेपी को अपना महापौर बनाने के लिए सौदेबाजी करनी पड़ सकती है। लातूर में कांग्रेस और वंचित आघाड़ी को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है।
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वहां वंचित ने महापौर पद की मांग की है जिससे विवाद पैदा हो गया है। उल्हासनगर में बीजेपी और शिंदे सेना की प्रतिस्पर्धा चल रही है। माना जाता है कि इस महीने के अंत तक समाधान निकल जाएगा। कुछ स्थानों पर नगरसेवक पाला बदल सकते हैं। अंबरनाथ में कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित 12 नगरसेवकों ने बीजेपी में प्रवेश कर लिया।
निर्दलीय व छोटे दलों के नगरसेवक सत्ता पाने के लिए सुविधा की भूमिका अपना सकते हैं। सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता, यही राजनीति का गणित हो गया है। घोड़ा बाजार में कुछ भी हो सकता है। हर पार्टी को अपने नगरसेवकों को बचाए रखना जरूरी हो गया है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






