निशानेबाज: जो बाइडेन का बेटा नादान, राष्ट्रपति का पद छोड़ने से पहले उसे दे डाला क्षमादान

जो बाइडेन 20 जनवरी को बाय-बाय कहकर व्हाइट हाउस से निकल जाएंगे। बाइडेन की स्मरणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है। लेकिन फिर भी उन्हें अपने बेटे की नादानी याद रही और उन्होंने उसे क्षमादान दे दिया।
जो बिडेन ने राष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले अपने बेटे को माफ़ कर दिया
(डिजाइन फोटो)
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नवभारत डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘‘निशानेबाज, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन 20 जनवरी को बाय-बाय कहकर व्हाइट हाउस से निकल जाएंगे और उनकी जगह नए राष्ट्रपति ट्रम्प रहने आ जाएंगे। इसके बाद बाइडेन उन पूर्व राष्ट्रपतियों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे जो अभी जीवित हैं। इनमें जिमी कार्टर, फोर्ड, बुश, क्लिंटन, ओबामा का समावेश है। बाइडेन की स्मरणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है। उन्हें डिमेंशिया है। इतने पर भी उन्हें अपने नालायक बेटे की नादानी याद रही और उन्होंने उसे क्षमादान देते हुए तमाम आरोपों और मामले-मुकदमों से मुक्त कर दिया। ऐसा उन्होंने राष्ट्रपति के विशेष अधिकारों के तहत किया।’’

हमने कहा, ‘‘बेटा कितना भी अयोग्य हो, उस पर पिता का स्नेह बना ही रहता है। बाइडेन ने भी अपने बेटे हंटर के गुनाहों को नजरअंदाज करते हुए उसे माफ कर दिया और उसे कोर्ट-कचहरी के चक्कर और जेल जाने से बचा लिया। हंटर ड्रग एडिक्ट हैं। अमेरिका में ऐसे व्यक्ति को गन खरीदने की अनुमति नहीं रहती फिर भी हंटर ने बंदूक खरीदी। इसके अलावा उसने टैक्स कानूनों का उल्लंघन भी किया था।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘जब बाइडेन ने बेटे को क्षमा कर दिया तो वहां का सुप्रीम कोर्ट भी कुछ नहीं कर सकता। भारत के राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख होते हैं जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति सर्वशक्तिमान होता है। जब रोनाल्ड रीगन अमेरिका के प्रेसीडेंट थे तब राजीव गांधी के अनुरोध पर उन्होंने अमेरिका की जेल से शहरयार नामक व्यक्ति को रिहा किया था। शहरयार मोहम्मद यूनुस का बेटा था जिन्हें राजीव गांधी चाचा कहा करते थे।’’

हमने कहा, ‘‘अमेरिका की बात अलग है अपने देश में अकाल तख्त गुनहगारों को तनखैया या पंथविरोधी घोषित कर सजा देता है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीरसिंह बादल को बेअदबी मामले में स्वर्णमंदिर तथा अन्य गुरुद्वारों में टॉयलेट व जूते साफ करने, जूठे बर्तन मांजने और सेवादार की ड्यूटी करने की सजा दी गई। एक समय पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री बूटासिंह को भी ऐसी सजा दी गई थी।’’

पड़ोसी ने कहा, ‘‘निशानेबाज, पिता बड़ा दिल रखकर अपने बेटे को माफ कर दे तो आपको कौन सी आपत्ति है। अपने यहां कहावत है- क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात। जैन धर्म में पर्यूषण पर्व के दौरान बड़े से बड़े लोग भी जाने-अनजाने में किसी का दिल दुखाने की बात को लेकर माफी मांगते हैं। महात्मा गांधी ने कहा था- पाप से घृणा करो, पापी से नहीं! इसलिए बाइडेन ने अपने बेटे को माफ करते हुए सुधरने का एक अवसर दे दिया।’’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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