निशानेबाज: कैसी होगी शहर की सरकार अब नए मेयर का इंतजार

Municipal Corporation Mayor Election: प्रशासक राज के बाद महापौर पद पर चयन को लेकर उत्सुकता है। गड्डेवाली सड़कें, दूषित पानी, ट्रैफिक और कचरा जैसी समस्याएं नए प्रथम नागरिक के लिए बड़ी चुनौती होंगी।
Shooters: What will the city government be like now? Waiting for the new mayor.
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, महापालिका चुनाव के बाद अब जनता को प्रतीक्षा है कि शहर का प्रथम नागरिक या फर्स्ट सिटिजन कौन बनेगा। यह एक सम्मान का पद है जिसे लेकर उत्सुकता होना स्वाभाविक है।'

हमने कहा, 'यह प्रथम नागरिक या द्वितीय नागरिक क्या है? सीधे-सीधे मेयर या महापौर कहिए ना। जिसमें काबिलियत होगी, उसको पार्टी के निर्देश पर इस पद के लिए चुन लिया जाएगा। लॉटरी के अनुसार महिला महापौर चुनी जाएगी। इसलिए सत्तारूढ़ दल की महिला कॉर्पोरेटरों के बीच होड़ या प्रतिस्पर्धा रहेगी। कोई चाहता है कि ताजगी वाले नए चेहरे को मौका दिया जाना चाहिए तो कोई अनुभवी महिला के पक्ष में है जिसे महापालिका में पहले पद मिल चुका हो और राजनीति के दावपेंच अच्छे से जानती हो।'

पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, 9 वर्ष से चले आ रहे प्रशासक राज के बाद महापालिका में निर्वाचित प्रतिनिधियों को मौका मिला है कि वह ज्वलंत समस्याओं को दूर कर ईमानदारी से अपने शहर का विकास करें। गड्डेवाली सड़कें, बदबूदार पानी और कीचड़ से भरे अंडरब्रिज, कचरे के ढेर, बेतरतीब यातायात की समस्याएं नए महापौर के सम्मुख बड़ी चुनौतियां रहेंगी। प्रशासनिक मशीनरी से सारे काम तत्परता से कराने होंगे, मनपा स्कूलों का स्तर सुधारना होगा। शहर की शक्ल को खूबसूरत बनाना होगा, सबसे बड़ी बात यह है कि शुद्ध पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी। इंदौर में दूषित पानी से दर्जनों लोगों की मौत ने देश के हर शहर के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी सशक्त रहना होगा। पार्किंग की महापौर जगह पर लोगों ने दुकानें बना रखी हैं। सड़कों व फुटपाथ पर गाड़ी पार्क करने से यातायात में रुकावट आती हैं। समस्याएं अनेक हैं जिनका समाधान निकालना होगा।'

हमने कहा, 'हमारे देश में मेयर के अधिकार सीमित होते हैं। नागपुर और न्यूयॉर्क के मेयर की तुलना मत कीजिएगा, विदेश में मेयर के अधीन पूरा शहर प्रशासन और वहां की पुलिस रहती है। वह शहर का बाँस रहता है। एक समय था जब एयरपोर्ट पर किसी विदेशी अतिथि का सर्वप्रथम स्वागत महापौर पुष्पगुच्छ देकर करता था। अब वह वात नहीं रही।'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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