भगवान श्रीराम की बहन शांता कौन थीं? जानिए क्यों रामायण में उनका उल्लेख नहीं मिलता

Ramayan Ki Kahani: रामायण और रामचरितमानस को अत्यंत पवित्र और पूजनीय ग्रंथ माना जाता है। इन ग्रंथों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जन्म, उनके जीवन आदर्शों और धरती पर अधर्म के अंत की कथा मिलती है।
Who was Shanta, Lord Rama's sister why she is not mentioned in the Ramayana.
Ram with sister (Source. Pinterest)
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Ramayan Mein Bhagwan Ram Ke Behen Ki Kahani: हिंदू धर्म में रामायण और रामचरितमानस को अत्यंत पवित्र और पूजनीय ग्रंथ माना जाता है। इन ग्रंथों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जन्म, उनके जीवन आदर्शों और धरती पर अधर्म के अंत की कथा मिलती है। रामायण यह स्पष्ट करती है कि भगवान श्रीराम को "मर्यादा पुरुषोत्तम" क्यों कहा गया। आम तौर पर रामायण की कथा में राजा दशरथ, उनकी तीन रानियों और चार पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का ही वर्णन मिलता है। लेकिन कुछ पौराणिक कथाओं में यह भी उल्लेख है कि भगवान श्रीराम की एक बहन भी थीं, जिनका नाम शांता था। सवाल यह उठता है कि इतनी महत्वपूर्ण कथा में शांता का जिक्र क्यों नहीं मिलता?

भगवान राम के पांच भाई-बहन होने की मान्यता

रामायण के अनुसार राजा दशरथ की तीन पत्नियां थीं कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा जिनसे उन्हें चार पुत्र प्राप्त हुए। माता कौशल्या से श्रीराम, माता कैकेयी से भरत और माता सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ। हालांकि कुछ धर्म ग्रंथों और पौराणिक मान्यताओं में कहा गया है कि राजा दशरथ की एक पुत्री भी थीं। इस मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम की बहन का नाम शांता था। शांता का उल्लेख बहुत कम ग्रंथों में मिलता है, इसी कारण सामान्य जन उनके बारे में अधिक नहीं जानते।

शांता थीं विद्वान और गुणी

पौराणिक कथाओं के अनुसार शांता राजा दशरथ और माता कौशल्या की पुत्री थीं। उन्हें अत्यंत बुद्धिमान, संस्कारी और हर विषय में निपुण बताया गया है। कहा जाता है कि राजा दशरथ अपनी पुत्री के ज्ञान और समझ से बेहद प्रभावित रहते थे। शांता में राजकुमारी होने के साथ-साथ विदुषी होने के भी सभी गुण मौजूद थे। लेकिन राजा दशरथ के जीवन में एक ऐसा निर्णय आया, जिसके कारण उन्हें अपनी प्रिय पुत्री को गोद देना पड़ा।

राजा दशरथ ने शांता को क्यों दिया गोद?

कथाओं के अनुसार माता कौशल्या की एक बहन थीं वर्षिनी जिनका विवाह अंगदेश के राजा रोमपद से हुआ था। राजा रोमपद और रानी वर्षिनी निःसंतान थे। एक बार वे अयोध्या आए और राजा दशरथ से मिले। बातचीत के दौरान जब राजा दशरथ को यह पता चला कि उनके कोई संतान नहीं है, तो वे अत्यंत व्यथित हो गए। इसके बाद उन्होंने माता कौशल्या से विचार-विमर्श किया और अपनी पुत्री शांता को राजा रोमपद और रानी वर्षिनी को गोद दे दिया।

कहा जाता है कि शांता का पालन-पोषण अंगदेश में हुआ और वे अपने भाइयों से स्नेह बनाए रखती थीं। मान्यता है कि शांता हर रक्षाबंधन पर अपने भाइयों को राखी भेजा करती थीं, जिससे उनका पारिवारिक संबंध बना रहा।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।

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