महामृत्युंजय मंत्र: अकाल मृत्यु को टालने वाला शिव का वो 'कवच' जिसके रहस्य बहुत कम लोग जानते हैं!

Akal Mrityu Protection:महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित शक्तिशाली मंत्र है। श्रद्धा से इसका जाप करने पर अकाल मृत्यु का भय कम होता है, स्वास्थ्य में सुधार आता है।
Mahamrityunjaya Mantra
भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
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Mahamrityunjaya Mantra: महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली मंत्र है।  धर्म शास्त्रों में भगवान शिव की कृपा पाने, अकाल मृत्यु टालने और आरोग्यता के लिए महामृत्युंजय मंत्र को  सर्वोत्तम बताया गया है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर रुद्राक्ष की माला से, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके 108 बार शुद्धता से जाप करना चाहिए।

ऐसा करने से यह नकारात्मकता दूर कर जीवन में सुख-शांति लाता है।लेकिन आपको यह लाभ तभी मिल सकता है जब आप इससे जुड़े नियमों का भी पूरा ध्यान रखें।

महामृत्युंजय मंत्र जाप करने की क्या है सही विधि

  • मंत्र जाप समय

सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच है।

  • आसन व दिशा

कुश (कुशा) के आसन पर बैठें और मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

  • माला व संख्या

रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें और 108 बार (एक माला) या अधिक का जाप करें।

  • शुद्धता

मानसिक और शारीरिक पवित्रता बहुत आवश्यक है। जाप के समय होठों को हिलाएं लेकिन आवाज बहुत धीमी हो।

  • सावधानी

 महामृत्युंजय मंत्र  का उच्चारण बिल्कुल सही होना चाहिए, गलत उच्चारण करने से बचें।

महामृत्युंजय मंत्र जाप करने के क्या है फायदे?

  • अकाल मृत्यु का डर समाप्त

मान्यताओं के अनुसार, यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय और जानलेवा संकटों को टालता है।

  • आरोग्य और दीर्घायु

यह मंत्र गंभीर रोगों से लड़ने की शक्ति देता है और स्वस्थ जीवन प्रदान करता है।

  • मानसिक शांति

नकारात्मक विचारों और भय को दूर कर मानसिक शांति प्रदान करता है।

  • सफलता

जीवन में आने वाली हर तरह की बाधाओं और दरिद्रता को दूर करता है।

मंत्र से जुड़ी रहस्यमयी बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं

  • महत्व: वेदों से भी प्राचीन, अकाल मृत्यु रोकने, रोगों से मुक्ति और मोक्ष के लिए सबसे शक्तिशाली शिव मंत्र।

  • ऋषि: मार्कंडेय ने भगवान शिव से प्राप्त किया।

  • अक्षर और शक्ति: 33 अक्षर = 33 देव शक्तियाँ (8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, 2 अश्विनी कुमार), शरीर के अलग-अलग अंगों की रक्षा।

  • वैज्ञानिक प्रभाव: उच्चारण से शरीर में कंपन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक शांति।

  • ककड़ी और मृत्यु: 'उर्वारुकमिव बन्धनान्' = संसार के मोह-माया से मुक्त होना।

  • जाप विधि: रुद्राक्ष माला से, उत्तर या पूर्व दिशा में, सुबह 2–4 बजे सर्वोत्तम।

 क्या करें क्या न करें

घर पर प्रतिदिन ज्यादा नहीं, केवल एक या तीन माला का ही सामान्य रूप से जाप करना चाहिए। इसके अधिक जाप योग्य पंडितों द्वारा ही कराए जाने चाहिए।

जाप के दौरान नियम: मंत्र जाप के समय सात्विक भोजन और ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए।

शास्त्र में बताया गया है भगवान भोलेनाथ के ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जो व्यक्ति सवा लाख बार जाप करता है, उन्हें जीवन में समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। इसके साथ भोलेनाथ के लघु ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का 11 लाख बार जाप किया जाना आवश्यक है। प्रत्येक सोमवार के दिन रुद्राक्ष की एक माला ‘महामृत्युंजय जाप’  जरूर करना चाहिए।

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