एक ही दिन है नाग पंचमी और मंगला गौरी पावन व्रत, 'इन' नियमों का करें पालन

Nag Panchami : इस साल नाग पंचमी और मंगला गौरी का तीसरा व्रत एक ही दिन रखा जा रहा है, इसलिए कुछ विशेष कार्य करके आप भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
एक ही दिन है नाग पंचमी और मंगला गौरी पावन व्रत, 'इन' नियमों का करें पालन
नाग पंचमी और मंगला गौरी करें ये उपाय (सौ.सोशल मीडिया)
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Nag Panchami 29 July : 29 जुलाई को नाग पंचमी त्योहार के साथ मंगला गौरी व्रत भी रखा जाएगा। आपको बता दें कि सावन महीने के हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत में माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।

वहीं इस साल नाग पंचमी और मंगला गौरी का तीसरा व्रत एक ही दिन रखा जा रहा है, इसलिए कुछ विशेष कार्य करके आप भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं इन दोनों शुभ योग में क्या करना चाहिए।

नाग पंचमी और मंगला गौरी के शुभ संयोग में करें ये उपाय :

खीर का भोग

आपको बता दें, मंगला गौरी व्रत और नाग पंचमी एक ही दिन हैं इसलिए इस दिन आपको माता गौरी को खीर का भोग लगाना चाहिए। साथ ही शिवलिंग को दूध से अभिषेक आपको करना चाहिए और नाग देवता को भी दूध चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से कालसर्प दोष, मंगल दोष, चंद्र दोष आदि यह उपाय करने से दूर होने लगते हैं।

मंगला गौरी की व्रत कथा

ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, नाग पंचमी और मंगला गौरी व्रत के शुभ संयोग में आपको नाग पंचमी की भी और मंगला गौरी की व्रत कथा का भी पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं।

माता पार्वती के मंत्रों का जप

इस दिन आपको माता पार्वती के मंत्रों का जप भी अवश्य करना चाहिए। माता पार्वती के कुछ मंत्र इस प्रकार हैं- ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः/ ऊँ पार्वत्यै नमः/ ऊँ साम्ब शिवाय नमः/ ऊँ गौरये नमः । ये मंत्र आपको मानसिक शांति और माता पार्वती का आशीर्वाद दिलाते हैं।

शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ

मंगला गौरी व्रत और नाग पंचमी एक ही दिन हैं इसलिए इस दिन आपको शिव रक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती और नाग देवता भी प्रसन्न होते हैं। यह आसान सा उपाय जीवन में आ रही हर परेशानी को हल कर सकता है।

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक एवं ज्योतिषीय महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार, मां मंगला गौरी के व्रत को करने से अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है।

इसी प्रकार पूरे नियम के अनुसार श्रद्धा सहित इस व्रत को करने पर विवाहित महिलाओं को वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। इस व्रत के पुण्यफल से उनके जीवन में हमेशा सुख-सौभाग्य बना रहता है।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से कुंडली के मंगल दोष के कारण आ रही सभी बाधाएं शीघ्र ही दूर होती हैं और जीवन में सब मंगल ही मंगल होता है।

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