
घोड़े की नाल लगाने की परंपरा(सौ.सोशल मीडिया)
Horse Shoe On Main Door: भारतीय परंपरा और वास्तु शास्त्र में घोड़े की नाल को शुभ और शक्तिशाली प्रतीक माना गया है। घोड़े की नाल सिर्फ एक प्रतीक नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का एक सुरक्षा कवच भी माना जाता है। घर के मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाना सदियों पुरानी परंपरा रही है। लोग इसे अक्सर घर, दुकान या व्यापारिक स्थलों के बाहर अवश्य टांगते हैं।
लेकिन, क्या यह सिर्फ एक सजावट की चीज है? शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, इसके पीछे गहरी धार्मिक और आध्यात्मिक वजहें छिपी हैं।जानिए क्या है घर के दरवाजे पर घोड़े की नाल लगाने की परंपरा
भारतीय संस्कृति और वास्तु शास्त्र में घोड़े की नाल को शुभता और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि घोड़े की नाल में नकारात्मक शक्तियों को रोकने और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने की क्षमता होती है। यही कारण है कि कई घरों में मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाई जाती है।
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, लोहे से बनी घोड़े की नाल विशेष रूप से प्रभावशाली मानी जाती है। इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है, इसलिए यह शनि दोष, बाधाओं और जीवन में आने वाली रुकावटों को कम करने में सहायक मानी जाती है। पुरानी और इस्तेमाल की हुई घोड़े की नाल को अधिक शुभ माना जाता है।
वास्तु के अनुसार, घोड़े की नाल को घर के मुख्य दरवाजे पर इस तरह लगाना चाहिए कि उसके दोनों सिरे ऊपर की ओर खुले हों। ऐसा माना जाता है कि इससे सकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर प्रवेश करती है और वहीं बनी रहती है। दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर मुख वाले घरों में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
नाल को लगाने से पहले साफ करना जरूरी होता है। टूटी या अत्यधिक जंग लगी नाल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। मान्यता के अनुसार, शनिवार के दिन इसे विधि-विधान से लगाना अधिक शुभ फल देता है।
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ज्योतिष शास्त्र में घोड़े की नाल केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है। सही दिशा और नियमों के साथ लगाई गई घोड़े की नाल घर में सकारात्मक माहौल, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।






