घोड़े की नाल की अंगूठी क्यों नहीं पहननी चाहिए (सौ.सोशल मीडिया)
Premanand Maharaj on Horseshoe Ring: हिंदू धर्म में ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र का बड़ा महत्व होता है। ऐसे में लोग ग्रहों के प्रभाव और उनसे जुड़ी पीड़ा दूर करने के लिए कई तरह के उपाय अपनाते हैं, जिसमें घोड़े की नाल से जुड़े उपाय भी अपनाते हैं।
ज्योतिषयों के अनुसार, घर में घोड़े की नाल भी टांगना शुभ होता है। साथ ही शनि की साढ़ेसाती से बचने के लिए अधिकतर लोग घोड़े की नाल की अंगूठी पहनते है।
लेकिन क्या वास्तव में इससे जीवन की परेशानियां दूर होती हैं? इस सवाल पर प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज ने लोगों की शंका को दूर किया है। ऐसे में आइए जानते है प्रेमानंद महाराज जी से इस बारे में-
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि, घोड़े की नाल की अंगूठी नहीं पहननी चाहिए। इसके पीछे उन्होंने एक गहरी बात बताई है। जब घोड़े के खुरों में नाल ठोंकी जाती है, उसकी नाल से आप अपनी दुख-पीड़ा कैसे दूर कर सकते हैं? जो खुद दुखी है, वह दूसरों के दुख कैसे दूर कर सकता है? इस तरह, उन्होंने इस प्रचलित धारणा को सिरे से खारिज कर दिया कि घोड़े की नाल की अंगूठी पहनने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
प्रेमानंद महाराज ने शनि की पीड़ा से मुक्ति पाने का एक अद्भुत और सरल उपाय बताया। उन्होंने कहा कि ग्रहों की पीड़ा केवल ईश्वर का नाम जपने से दूर होती है।
प्रेमानंद महाराज का मानना है कि, जब तक आप अपना आचरण ठीक नहीं करते, तब तक किसी भी तरह की अंगूठी पहनने या तेल चढ़ाने का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि ईश्वर की भक्ति अगर सच्चे मन से की जाए तो हर कष्ट दूर हो जाता है। जब आपका आचरण सुधरता है और मन में हरि का वास होता है, तभी ग्रह भी आपके अनुकूल होते हैं।
प्रेमानंद महाराज ने इस बात पर जोर दिया कि भगवान के नाम का भजन किए बिना जीवन के विघ्न नहीं टलेंगे। उन्होंने कहा, ‘सब हरि के अनुचर हैं। यदि तुम श्रीकृष्ण के सच्चे दास हो तो तुम्हें किसी को तेल चढ़ाने की जरूरत नहीं, बल्कि स्वयं को हरि के चरणों में चढ़ा दो।
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कहने तात्पर्य यह है कि बाहरी उपायों को करने के बजाय हमें अपनी अंदरूनी शक्ति और ईश्वर के प्रति सच्ची निष्ठा एवं विश्वास रखना चाहिए। कहते हैं, सच्ची भक्ति और अच्छे कर्म ही हमें हर तरह के कष्टों और परेशानियों से मुक्ति दिला सकते हैं।