इस मंदिर में मासिक धर्म में भी महिलाएं करती हैं पूजा, जानें अनूठा विश्वास और अद्भुत परंपरा

Women Worship Temple: कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जिन्हें चमत्कारों और लोक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लेकिन कोयंबटूर के पास स्थित मां लिंग भैरवी मंदिर अपनी अनूठी प्रथा के लिए उल्लेखनीय है।
इस मंदिर में मासिक धर्म में भी महिलाएं करती हैं पूजा, जानें अनूठा विश्वास और अद्भुत परंपरा
मां लिंग भैरवी मंदिर में क्या है खास। (सौ. Facebook)
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Role of Women in Hindu Temples: भारत में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं जिन्हें चमत्कारों और लोक मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लेकिन कोयंबटूर के पास स्थित मां लिंग भैरवी मंदिर अपनी अनूठी प्रथा के लिए उल्लेखनीय है। यहाँ पूजा-अनुष्ठान से लेकर गर्भगृह की देखभाल तक सब कुछ केवल महिलाओं द्वारा संचालित होता है। और सबसे अनोखी बात मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं पूजा और दर्शन कर सकती हैं।

मंदिर की अनोखी प्रथा पुरुष वर्जित, महिलाओं को पूर्ण आज़ादी

कई हिंदू मंदिरों में परंपरागत तौर पर मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा करने से रोका जाता है; लेकिन इस मंदिर की प्रथा ने इन रूढ़ियों को पूरी तरह खारिज किया है। यहाँ पूजा, देखभाल और व्यवस्थापन सभी महिला पुजारियों द्वारा किया जाता है। गर्भगृह (मंदिर का अंदरूनी पवित्र कक्ष) में भी केवल महिलाएं प्रवेश करती हैं। इन पुजारियों को 'भैरागिनी' कहा जाता है। इस मंदिर में मां की मूर्ति नहीं है, बल्कि पूजा एक लंबे चपटे पत्थर के रूप में की जाती है, जिस पर त्रिकोण आकृतियाँ अंकित हैं जो 'गर्भ' और 'सृष्टि' का प्रतीक मानी जाती हैं। यही कारण है कि यह मंदिर नारी शक्ति के सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बन गया है।

मात्र नहीं प्रतीक है यह मंदिर स्त्री शक्ति का

मां लिंग भैरवी मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक सामाजिक और धार्मिक टिप्पणी है उस विश्वास की, जो महिलाओं को आध्यात्मिक और धार्मिक जिम्मेदारी देता है। यहाँ किसी पुरुष की ज़रूरत नहीं सारा संचालन, देखभाल, अनुष्ठान, सफाई, सेवा सब महिलाओं के हाथों में है। यह कदम उन तमाम परंपराओं और मान्यताओं को चुनौती देता है, जो अक्सर महिलाओं को धार्मिक क्रियाओं से अलग रखती आई हैं। यह मंदिर साबित करता है: महिलाओं की आस्था और भूमिका किसी से कम नहीं।

दक्षिण भारत में और मंदिर महिलाओं द्वारा संचालित धार्मिक स्थल

मां लिंग भैरवी मंदिर अकेला ऐसा स्थान नहीं है। दक्षिण भारत में कुछ अन्य मंदिर भी हैं, जहाँ महिलाओं को पूजा और व्यवस्थापन का पूर्ण अधिकार है:

  • चक्कुलाथुकावु मंदिर (केरल): यहाँ पोंगल उत्सव के दौरान 10–11 दिनों तक पूजा सिर्फ महिलाओं द्वारा की जाती है, और इस अवधि में पुरुषों का प्रवेश वर्जित रहता है। इसे 'महिलाओं का सबरीमाला' भी कहा जाता है।
  • मन्नारसला नागराज मंदिर (अल्पुझा, केरल): नाग देवताओं को समर्पित इस प्राचीन मंदिर में आज भी मुख्य पूजारी एक महिला होती है, जिन्हें 'मन्नारसला अम्मा' कहा जाता है।
  • कुमारी अम्मन मंदिर (कन्याकुमारी, तमिलनाडु): यहाँ कुमारी रूप में मां की पूजा होती है, और गर्भगृह में पूजा तथा दर्शन केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है।

इन मंदिरों से स्पष्ट है कि भारत के दक्षिणी भाग में स्त्री-पूजा और महिला-पुजारियों की परंपरा जड़ें गहरी हैं।

नारी श्रद्धा और नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण

मां लिंग भैरवी मंदिर और अन्य ऐसे मंदिर यह दिखाते हैं कि धार्मिक आस्था और श्रद्धा केवल पुरुषों तक सीमित नहीं। जब नारी को धार्मिक जिम्मेदारी मिलता है, वह श्रद्धा, आत्म-विश्वास और सम्मान के साथ इसे निभाती है। यह स्थलों परंपराओं और रूढ़ियों को किंचित भी नज़रअंदाज किए बिना, महिलाओं को पूजा और धार्मिक क्रियाओं में समान भागीदारी देने का जीवंत उदाहरण है जो आधुनिक भारत के लिए प्रेरणा बन सकता है।

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