- Hindi News »
- India »
- How Much Do You Know Aryabhatta Who Changed The Definition Of Mathematics
गणित की परिभाषा बदलने वाले आर्यभट्ट को कितना जानते हैं आप?
- Written By: मनोज पांडे

File Photo
मुंबई: आर्यभट्ट प्राचीन समय के सबसे महान खगोलशास्त्रीयों और गणितज्ञों में से एक थे। विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उनके कार्य आज भी वैज्ञानिकों को प्रेरणा देते हैं। आर्यभट्ट उन पहले व्यक्तियों में से थे जिन्होंने बीजगणित (एलजेबरा) का प्रयोग किया। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘आर्यभटिया’ (गणित की पुस्तक) को कविता के रूप में लिखा। यह प्राचीन भारत की बहुचर्चित पुस्तकों में से एक है। इस पुस्तक में दी गयी ज्यादातर जानकारी खगोलशास्त्र और गोलीय त्रिकोणमिति से संबंध रखती है। ‘आर्यभटिया’ में अंकगणित, बीजगणित और त्रिकोणमिति के 33 नियम भी दिए गए हैं।
कॉपरनिकस से 1 हज़ार साल पहले ही आर्यभट्ट ने यह खोज कर ली थी कि पृथ्वी है गोल
आज हम सभी इस बात को जानते हैं कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है और इसी कारण रात और दिन होते हैं। मध्यकाल में ‘निकोलस कॉपरनिकस’ ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया था पर इस वास्तविकता से बहुत कम लोग ही परिचित होगें कि ‘कॉपरनिकस’ से लगभग 1 हज़ार साल पहले ही आर्यभट्ट ने यह खोज कर ली थी कि पृथ्वी गोल है और उसकी परिधि अनुमानत: 24835 मील है। सूर्य और चन्द्र ग्रहण के हिन्दू धर्म की मान्यता को आर्यभट्ट ने ग़लत सिद्ध किया। इस महान वैज्ञानिक और गणितग्य को यह भी ज्ञात था कि चन्द्रमा और दूसरे ग्रह सूर्य की किरणों से प्रकाशमान होते हैं। आर्यभट्ट ने अपने सूत्रों से यह सिद्ध किया कि एक वर्ष में 366 दिन नहीं वरन 365.2951 दिन होते हैं।
सम्बंधित ख़बरें
WhatsApp से आधार कार्ड डाउनलोड करने का आसान तरीका… जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्रोसेस
‘नागजिला’ का OTT प्लान कन्फर्म! थिएटर के बाद इस प्लेटफॉर्म पर दिखेगा कार्तिक आर्यन का इच्छाधारी नाग अवतार
Reels और Memes के दौर में RSS का बड़ा प्लान; मोहन भागवत बोले- सोशल मीडिया पर बढ़ानी होगी सक्रियता
जामा मस्जिद बाजार में चोरी की कोशिश का वीडियो वायरल, युवक ने महिला को रंगे हाथ पकड़ा
File Photo
गुप्तकाल को भारत के स्वर्णिम युग के रूप में जाना जाता है
आर्यभट्ट ने अपने ग्रन्थ ‘आर्यभटिया’ में अपना जन्मस्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 (476) लिखा है। इस जानकारी से उनके जन्म का साल तो निर्विवादित है परन्तु वास्तविक जन्मस्थान के बारे में विवाद है। कुछ स्रोतों के अनुसार आर्यभट्ट का जन्म महाराष्ट्र के अश्मक प्रदेश में हुआ था और ये बात भी तय है की अपने जीवन के किसी काल में वे उच्च शिक्षा के लिए कुसुमपुरा गए थे और कुछ समय वहां रहे भी थे। हिन्दू और बौध परम्पराओं के साथ-साथ सातवीं शताब्दी के भारतीय गणितज्ञ भाष्कर ने कुसुमपुरा की पहचान पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) के रूप में की है। यहाँ पर अध्ययन का एक महान केन्द्र, नालन्दा विश्वविद्यालय स्थापित था और संभव है कि आर्यभट्ट इससे जुड़े रहे हों। ऐसा संभव है कि गुप्त साम्राज्य के अन्तिम दिनों में आर्यभट्ट वहां रहा करते थे। गुप्तकाल को भारत के स्वर्णिम युग के रूप में जाना जाता है। आर्यभट्ट के कार्यों की जानकारी उनके द्वारा रचित ग्रंथों से मिलती है। इस महान गणितग्य ने आर्यभटिय, दशगीतिका, तंत्र और आर्यभट्ट सिद्धांत जैसे ग्रंथों की रचना की थी। विद्वानों में ‘आर्यभट्ट सिद्धांत’ के बारे में बहुत मतभेद है । ऐसा माना जाता है कि ‘आर्यभट्ट सिद्धांत’ का सातवीं शदी में व्यापक उपयोग होता था। सम्प्रति में इस ग्रन्थ के केवल 34 श्लोक ही उपलब्ध हैं और इतना उपयोगी ग्रंथ लुप्त कैसे हो गया इस विषय में भी विद्वानों के पास कोई निश्चित जानकारी नहीं है।
File Photo
आर्यभटीय
आर्यभटीय उनके द्वारा किये गए कार्यों का प्रत्यक्ष विवरण प्रदान करता है। ऐसा माना जाता है कि आर्यभट्ट ने स्वयं इसे यह नाम नही दिया होगा बल्कि बाद के टिप्पणीकारों ने आर्यभटीय नाम का प्रयोग किया होगा। इसका उल्लेख भी आर्यभट्ट के शिष्य भास्कर प्रथम ने अपने लेखों में किया है। इस ग्रन्थ को कभी-कभी आर्य-शत-अष्ट (अर्थात आर्यभट्ट के 108 – जो की उनके पाठ में छंदों कि संख्या है) के नाम से भी जाना जाता है। आर्यभटीय में वर्गमूल, घनमूल, समान्तर श्रेणी तथा विभिन्न प्रकार के समीकरणों का वर्णन है। वास्तव में यह ग्रन्थ गणित और खगोल विज्ञान का एक संग्रह है। आर्यभटीय के गणितीय भाग में अंकगणित, बीजगणित, सरल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति शामिल हैं। इसमे सतत भिन्न (कँटीन्यूड फ़्रेक्शन्स), द्विघात समीकरण (क्वड्रेटिक इक्वेशंस), घात श्रृंखला के योग (सम्स ऑफ पावर सीरीज़) और ज्याओं की एक तालिका (Table of Sines) शामिल हैं। आर्यभटीय में कुल 108 छंद है, साथ ही परिचयात्मक 13 अतिरिक्त हैं। यह चार पदों अथवा अध्यायों में विभाजित है गीतिकपाद, गणितपाद, कालक्रियापाद, गोलपाद, आर्य-सिद्धांत।
ग्रन्थ में ढेर सारे खगोलीय उपकरणों का भी वर्णन
आर्य-सिद्धांत खगोलीय गणनाओं के ऊपर एक कार्य है। जैसा कि बताया जा चुका है, यह ग्रन्थ अब लुप्त हो चुका है और इसके बारे में हमें जो भी जानकारी मिलती है वो या तो आर्यभट्ट के समकालीन वराहमिहिर के लेखनों से अथवा बाद के गणितज्ञों और टिप्पणीकारों जैसे ब्रह्मगुप्त के कार्यों और लेखों से। हमें इस ग्रन्थ के बारे में जो भी जानकारी उपलब्ध है उसके आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह कार्य पुराने सूर्य सिद्धांत पर आधारित है और आर्यभटीय के सूर्योदय की अपेक्षा इसमें मध्यरात्रि-दिवस-गणना का उपयोग किया गया है। इस ग्रन्थ में ढेर सारे खगोलीय उपकरणों का भी वर्णन है। इनमें मुख्य हैं शंकु-यन्त्र, छाया-यन्त्र, संभवतः कोण मापी उपकरण, धनुर-यन्त्र / चक्र-यन्त्र, एक बेलनाकार छड़ी यस्ती-यन्त्र, छत्र-यन्त्र और जल घड़ियाँ।
आर्यभट्ट का योगदान
आर्यभट का भारत और विश्व के गणित और ज्योतिष सिद्धान्त पर गहरा प्रभाव रहा है। भारतीय गणितज्ञों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले आर्यभट ने 120 आर्याछंदों में ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांत और उससे संबंधित गणित को सूत्ररूप में अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘आर्यभटीय’ में प्रस्तुत किया है। उन्होंने गणित के क्षेत्र में महान आर्किमिडीज़ से भी अधिक सटीक ‘पाई’ के मान को निरूपित किया और खगोलविज्ञान के क्षेत्र में सबसे पहली बार यह घोषित किया गया कि पृथ्वी स्वयं अपनी धुरी पर घूमती है। स्थान-मूल्य अंक प्रणाली आर्यभट्ट के कार्यों में स्पष्ट रूप से विद्यमान थी। हालांकि उन्होंने शुन्य दर्शाने के लिए किसी प्रतीक का प्रयोग नहीं किया, परन्तु गणितग्य ऐसा मानते हैं कि रिक्त गुणांक के साथ, दस की घात के लिए एक स्थान धारक के रूप में शून्य का ज्ञान आर्यभट्ट के स्थान-मूल्य अंक प्रणाली में निहित था। यह हैरान और आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि आजकल के उन्नत साधनों के बिना ही उन्होंने लगभग डेढ़ हजार साल पहले ही ज्योतिषशास्त्र की खोज की थी। जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं, कोपर्निकस (1473 से 1543 इ.) द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत की खोज आर्यभट हजार वर्ष पहले ही कर चुके थे। “गोलपाद” में आर्यभट ने सर्वप्रथम यह सिद्ध किया कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। इस महान गणितग्य के अनुसार किसी वृत्त की परिधि और व्यास का संबंध 62,832 : 20,000 आता है जो चार दशमलव स्थान तक शुद्ध है। आर्यभट्ट कि गणना के अनुसार पृथ्वी की परिधि 39,968.0582 किलोमीटर है, जो इसके वास्तविक मान 40,075.0167 किलोमीटर से केवल 0.2 % कम है।
How much do you know aryabhatta who changed the definition of mathematics
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
Topics:
लेटेस्ट न्यूज़
WhatsApp से आधार कार्ड डाउनलोड करने का आसान तरीका… जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्रोसेस
Mar 19, 2026 | 05:33 PM‘नागजिला’ का OTT प्लान कन्फर्म! थिएटर के बाद इस प्लेटफॉर्म पर दिखेगा कार्तिक आर्यन का इच्छाधारी नाग अवतार
Mar 19, 2026 | 05:28 PMReels और Memes के दौर में RSS का बड़ा प्लान; मोहन भागवत बोले- सोशल मीडिया पर बढ़ानी होगी सक्रियता
Mar 19, 2026 | 05:24 PMजामा मस्जिद बाजार में चोरी की कोशिश का वीडियो वायरल, युवक ने महिला को रंगे हाथ पकड़ा
Mar 19, 2026 | 05:24 PMक्या है 100 साल पुराना ‘जोन्स एक्ट’ जिसे ट्रंप ने किया सस्पेंड? जानें ईरान युद्ध के बीच क्यों पड़ी इसकी जरूरत
Mar 19, 2026 | 05:20 PMBengal Chunav 2026: ‘लेफ्ट फ्रंट’ ने जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट, सुवेंधु अधिकारी के खिलाफ इस नेता को टिकट
Mar 19, 2026 | 05:13 PMगुड़ी पड़वा पर सिद्धिविनायक में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त
Mar 19, 2026 | 05:12 PMवीडियो गैलरी

‘हिम्मत है तो रोक कर दिखाओ’, हैदराबाद के मुस्लिम उपदेशक ने CM योगी को दी चुनौती; सड़क पर नमाज पढ़ने पर अड़ा
Mar 18, 2026 | 10:05 PM
इंदौर में चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रिक कार में धमाका, 8 लोगों की मौत; एक गलती से उजड़ा परिवार- VIDEO
Mar 18, 2026 | 09:41 PM
‘भारत विरोधी ताकतों के साथ हैं राहुल गांधी’, विदेशी रिपोर्ट को लेकर गौरव भाटिया का तीखा हमला- VIDEO
Mar 18, 2026 | 09:36 PM
इंदौर में EV कार के चार्जिंग पॉइंट में धमाका, पूरे घर में लग गई आग, 7 लोग की दर्दनाक मौत
Mar 18, 2026 | 01:41 PM
राज्यसभा में सांसदों की विदाई पर भावुक हुए PM मोदी, बोले- राजनीति में नहीं होता कोई फुलस्टॉप
Mar 18, 2026 | 01:25 PM
बिहार का ‘टोपीबाज’ रंजीत यादव गिरफ्तार, खुद को बताया था UPSC टॉपर; अब पहुंचा सलाखों के पीछे- VIDEO
Mar 17, 2026 | 09:29 PM










