इस देश में दिवाली को कहा जाता है 'तिहार', जानिए दीपोत्सव में किस-किस दिन क्या होता है यहां

Diwali 2025:दिवाली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे देश के बारे में जहां पर दिवाली को एक अनोखे रूप में मनाया जाता है।
इस देश में दिवाली को कहा जाता है 'तिहार', जानिए दीपोत्सव में किस-किस दिन क्या होता है यहां
किस देश में दिवाली को कहा जाता है 'तिहार' (सौ.सोशल मीडिया)
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 Diwali celebration in other countries  2025: हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपों एवं रोशनी का त्यौहार दिवाली इस साल दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है। इस दिन हिन्दू भक्त धन, समृद्धि, यश और वैभव की देवी लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है। मान्यता है कि,ऐसा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। लेकिन आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे देश के बारे में जहां यह त्यौहार एक अनोखे रूप में मनाया जाता है।

हम बात कर रहे हैं नेपाल की। आपको बता दें, नेपाल में दीपों एवं रोशनी का त्यौहार दिवाली को तिहार कहा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस पांच दिवसीय उत्सव को कैसे मनाया जाता है।

किस देश में दिवाली को कहा जाता है 'तिहार':

सबसे पहले जानते हैं क्या होता है तिहार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नेपाल में तिहार को 'यम पंचक' भी कहते हैं। यह मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है। यह त्यौहार प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। इस त्यौहार पर हर 5 दिन एक खास अनुष्ठान किया जाता है।

पहला दिन काग तिहार

नेपाल में दीपों एवं रोशनी का त्यौहार दिवाली यानी तिहार के पहले दिन काग तिहार मनाया जाता है। दिवाली यानी तिहार के पहले दिन कौओं को समर्पित होता है। दरअसल कौओं को यम का दूत माना जाता है। इस दिन लोग काग को मिठाई और अनाज खिलाते हैं ताकि आने वाले सालों में उनके घर में दुखों का नाश हो और सौभाग्य आए।

दूसरा दिन कुकुर तिहार

दिवाली के दूसरे दिन कुकुर तिहार मनाया जाता है जो कुत्तों को समर्पित होता है। कुत्तों को यमराज का रक्षक और दूत माना जाता है। उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है और सम्मान के रूप में उन्हें स्वादिष्ट भोजन खिलाया जाता है।

तीसरा दिन गाय तिहार

दिवाली के तीसरे दिन गायों की पूजा की जाती है। गाय हिंदू संस्कृति में माता धन और समृद्धि की प्रतीक माना गया है। शाम के समय घरों को दीपों और रोशनी से सजाया जाता है और लक्ष्मी पूजा की जाती है।

चौथा दिन गोरु तिहार

दिवाली के चौथा दिन बैलों को समर्पित किया गया है। यह दिन बैलों का कृषि में कड़ी मेहनत का सम्मान करने को समर्पित है। इस दिन को मानव आजीविका को बनाए रखने में पशुओं की महत्वपूर्ण भूमिका और उनके प्रति कृतज्ञता की याद में मनाया जाता है।

पांचवां दिन भाई दूज

पांचवें दिन भाई दूज मनाया जाता है। यह भाई बहनों के बीच के पवित्र बंधन का उत्सव है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं और उनके लंबी उम्र और समृद्धि की प्रार्थना करती है और भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।

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