यहां दर्शन करने पर मिलता है रुपयों-गहनों का प्रसाद, 300 करोड़ से सजता है देवी लक्ष्मी का मंदिर

Mahalakshmi Temple: हर मंदिर की अपनी अलग पहचान और मान्यता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में रुपये मिलते है।
Here, devotees receive offerings of money and jewelry, and the temple of Goddess Lakshmi is adorned with decorations worth 300 crore rupees.
Mahalakshmi Temple Ratlam (Source. X)
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Mahalakshmi Temple Ratlam: भारत में मंदिरों की कोई कमी नहीं है और हर मंदिर की अपनी अलग पहचान और मान्यता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे अद्भुत मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में रुपये और गहने दिए जाते हैं। यही नहीं, दिवाली के मौके पर इस मंदिर को फूलों से नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की नकदी और सोने-चांदी से सजाया जाता है। यह अनोखी परंपरा देश-विदेश में इस मंदिर को खास बनाती है।

दिवाली और देवी लक्ष्मी पूजा का खास महत्व

रोशनी और खुशहाली का पर्व दिवाली नजदीक है। इस पर्व पर देवी लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को धन-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। ऐसे में हम आपको देवी लक्ष्मी के उसी विशेष मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।

प्रसाद में मिलते हैं नोट और गहने

यह मंदिर दिवाली के समय फूलों और झालरों से नहीं, बल्कि नोटों से सजाया जाता है। यहां आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि नोटों के साथ-साथ सोने और चांदी के आभूषण भी मिलते हैं। यही वजह है कि दिवाली के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

नोट चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महालक्ष्मी मंदिर में प्राचीन काल में राजा-महाराजा सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति की कामना से मुद्राएं और आभूषण चढ़ाया करते थे। समय के साथ इस परंपरा ने नया रूप लिया और यहां नोट चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई, जो आज तक चली आ रही है।

कहां स्थित है यह चमत्कारी मंदिर

यह प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में स्थित है। दिवाली के मौके पर इस मंदिर को फूलों की बजाय नोटों, सोने और चांदी से सजाया जाता है, जो इसे देश के सबसे अनोखे मंदिरों में शामिल करता है।

पांच दिनों तक चलता है दीपोत्सव

इस मंदिर में दीपावली का पर्व धनतेरस से ही शुरू हो जाता है और पूरे पांच दिनों तक दीपोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान देवी लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर का दरबार भी सजता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

करोड़ों की सजावट, फिर भी नहीं खोता एक रुपया

दीपावली के समय रतलाम के माणक चौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर में करीब 200-300 करोड़ रुपये की नकदी और आभूषणों से सजावट की जाती है। यह सजावट भाई दूज तक रहती है। मान्यता है कि यहां भक्तों का कभी एक भी रुपया गायब नहीं हुआ और चढ़ाई गई नकदी व आभूषण उन्हें प्रसाद के रूप में वापस मिलते हैं।

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