
Mahabharata (Source. Pinterest)
Mahabharata Last Wish: महाभारत की गाथा ऐसी अद्भुत कथा है, जिसे जितनी बार पढ़ा जाए, हर बार कोई नया रहस्य और नई सीख सामने आती है। यह सिर्फ एक युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, त्याग और मानव मूल्यों की अमर गाथा है। आज भी महाभारत से जुड़े कई प्रसंग लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। आज हम आपको महाभारत युद्ध के कुछ महान और शक्तिशाली योद्धाओं की उन अंतिम इच्छाओं के बारे में बताएंगे, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
हिंदू धर्म में महाभारत को केवल सत्ता और सिंहासन की लड़ाई नहीं माना जाता, बल्कि इसे सत्य और अधर्म के बीच का संघर्ष कहा गया है। इस युद्ध में ऐसे कई योद्धा थे जिन्होंने निजी सुख-दुख से ऊपर उठकर केवल अपने कर्तव्य के लिए प्राणों का बलिदान दिया। यही कारण है कि महाभारत के पात्र आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
महाभारत के युद्ध में कई ऐसे वीर योद्धा थे, जो अपनी अपार शक्ति के साथ-साथ अपनी विनम्रता और त्याग के लिए भी जाने जाते थे। श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य लीला से न सिर्फ युद्ध की दिशा बदली, बल्कि कई योद्धाओं की अंतिम इच्छाएं भी पूरी कीं। इन इच्छाओं के पीछे छिपा भाव आज भी लोगों को भावुक कर देता है।
दानवीर कर्ण का नाम आते ही दान और त्याग की मिसाल सामने आती है। जीवनभर दान देने वाले कर्ण से श्रीकृष्ण ने उनके अंतिम समय में वरदान मांगने को कहा। तब कर्ण ने कहा कि अगले जन्म में श्रीकृष्ण उनके राज्य में जन्म लें। यह इच्छा कर्ण के विशाल हृदय और श्रीकृष्ण के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाती है।
दानवीर कर्ण ने अपनी दूसरी इच्छा में कहा कि उनका अंतिम संस्कार ऐसी जगह हो, जहां कभी कोई पाप न हुआ हो। श्रीकृष्ण ने उनकी यह इच्छा भी पूरी की। इसके बाद दानवीर कर्ण को मोक्ष प्राप्त हुआ और वह वैकुण्ठ लोक लौट गए। यह प्रसंग कर्ण की आत्मिक शुद्धता को दर्शाता है।
महाबली भीम के पुत्र घटोत्कच भी अद्भुत शक्तियों के स्वामी थे। जब श्रीकृष्ण ने उनकी अंतिम इच्छा पूछी, तो उन्होंने कहा कि मेरे शरीर को न तो भूमि को समर्पित करना, न बहाना, न अग्नि से दाह देना.केवल मेरे शरीर को वायु में विलीन कर देना। श्रीकृष्ण ने उनकी यह इच्छा भी पूरी की।
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विदुर को महाभारत का सबसे बुद्धिमान और नीति का ज्ञाता माना जाता है। जब श्रीकृष्ण ने उनसे उनकी अंतिम इच्छा पूछी, तो उन्होंने कहा कि मेरे मरने के पश्चात मेरे शरीर मरने के बाद सुदर्शन चक्र में विलीन हो जाए। श्रीकृष्ण ने उनकी इस इच्छा को भी स्वीकार किया। महाभारत के ये प्रसंग बताते हैं कि यह गाथा सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि आत्मा और मोक्ष की यात्रा भी है।






