
Lakshmi Narasimha Swamy Temple (Source. Trevel)
Miraculous Temples of India: भारत विविधताओं और आस्थाओं का देश है। यहां मौजूद लगभग हर धर्मस्थल से कोई न कोई चमत्कार जुड़ा हुआ है। कहीं मूर्ति से दूध पीने की बात होती है, तो कहीं आंसू बहने की। आज हम आपको ऐसे ही एक रहस्यमयी मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां यह दावा किया जाता है कि भगवान की मूर्ति जिंदा है। यह मान्यता सालों से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
यह अनोखा मंदिर तेलंगाना के वारंगल जिले के मल्लूर गांव में स्थित है। इसका नाम लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर है। यह मंदिर लगभग 1500 फीट की ऊंचाई पर पुट्टकोंडा पहाड़ी पर बना हुआ है। दूर-दूर से श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर में भगवान नरसिंह की मूर्ति स्थापित है। भक्तों की मान्यता है कि भगवान लक्ष्मी नरसिंह स्वामी की यह मूर्ति पहाड़ी पर स्वयं प्रकट हुई थी और इसे किसी इंसान ने नहीं बनाया। इसी वजह से इस मूर्ति को बेहद खास माना जाता है।
आमतौर पर मंदिरों में संगमरमर या पत्थर की कठोर मूर्तियां होती हैं, लेकिन इस मंदिर की मूर्ति को लेकर दावा किया जाता है कि इसकी त्वचा इंसान की तरह नरम है। कहा जाता है कि मूर्ति को दबाने पर उसमें लचीलापन महसूस होता है और कई कथाओं में यह भी कहा गया है कि ज्यादा दबाने पर खून निकलता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मल्लूर गांव में स्थित यह मंदिर करीब 4000 साल पुराना है। यहां मौजूद भगवान नरसिंह की मूर्ति को मानव शरीर की तरह सॉफ्ट बताया जाता है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।
भगवान नरसिंह की यह मूर्ति लगभग 10 फीट लंबी बताई जाती है। कहा जाता है कि अगर मूर्ति पर फूल रखकर दबाया जाए तो वह अंदर चला जाता है। कई मान्यताओं में यह भी दावा है कि अधिक दबाव डालने पर मूर्ति से खून निकल सकता है।
इस मंदिर से जुड़ी एक और चौंकाने वाली मान्यता यह है कि मूर्ति की नाभि से लगातार एक तरल पदार्थ निकलता रहता है। बताया जाता है कि इस लिक्विड को रोकने के लिए नाभि पर चंदन का लेप लगाया जाता है।
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भक्तों का कहना है कि मूर्ति के पास जाने पर सांस लेने जैसा अनुभव होता है। इसी आधार पर माना जाता है कि मंदिर में स्वयं नरसिंह स्वामी विराजमान हैं और उनकी उपस्थिति आज भी महसूस की जा सकती है।
Disclaimer: इस मंदिर से जुड़ी तमाम जानकारियां विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और यूट्यूब चैनलों में बताई गई जानकारियों पर आधारित हैं। इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है।






