पश्चिम बंगाल से लेकर बिहार में अलग-अलग होता है भाई दूज का रिवाज, जानिए हर एक की परंपरा

Bhai Dooj Celebration: दिवाली के अंतिम दिन भाई दूज मनाया जाता है जो भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। देश के कई हिस्सों में भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है लेकिन रिवाज अलग-अलग होते है।
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज (सौ. सोशल मीडिया)
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देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
Bhai Dooj 2025 Celebration: दीवाली का पर्व 5 दिनों का सबसे बड़ा और प्यारा त्योहार होता है। दिवाली के अंतिम दिन भाई दूज मनाया जाता है जो भाई-बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। देश के कई हिस्सों में भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है लेकिन रिवाज अलग-अलग होते है। हिंदू कैलेंडर के हिसाब से यह पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है।
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
पश्चिम बंगाल में भाई दूज का अलग महत्व होता है। यहां पर इस त्योहार को 'भाई फोंटा के नाम से जाना जाता है, जिसे काली पूजा के दो दिन बाद मनाया जाता है। इस खास त्योहार के मौके पर बहनें भाइयों के लिए भव्य भोज का आयोजन करती हैं।
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
भाई दूज की धूम उत्तर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में भी देखने के लिए मिलती है। इस दौरान बहनें अपने भाइयों को गालियां देती हैं और फिर सजा के तौर पर उन्हें सुई चुभा देती हैं। यह एक परंपरा मात्र है जो भाइयों को बुरी शक्तियों और दुष्प्रभावों से बचाता है।
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में भाई दूज को एक अलग नाम भाऊबीज के नाम से जाना जाता है।इस दौरान बहनें सुबह से ही भाई के लिए उपवास रखती हैं साथ ही भाई को एक चौकी पर बैठाकर, उन्हें करीठ फल खाने को देती हैं। बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, उनकी दीर्घायु, सफलता और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
जिन बहनों के भाई नहीं होते हैं, वो भाई दूज वाले दिन अपने हाथों पर मेहंदी लगाकर चंद्र देव की पूजा करती हैं. वहीं इन राज्यों में भाई दूज वाले दिन भाइयों को मिष्ठान में खीरनी, पूरी, श्रीखंड और बासुंदी पूरी खाने को दी जाती है।
देश में अलग तरीके से मनाते है भाई दूज
भारत के अलावा नेपाल में भी भाई दूज का त्योहार खास माना जाता है। नेपाल में इस त्योहार को भाई टीका के नाम से जानते है। नेपाल में इस पर्व को मैथली, नेवारी, बाहुन, छेत्री और थारु समुदायों द्वारा मनाया जाता है। बहनों द्वारा भाइयों के माथे पर 7 रंग का तिलक लगाया जाता है. आरती और मिठाई खिलाने के बाद भाई-बहनों को आशीर्वाद देते हैं।

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