
हिमंत बिस्वा सरमा (सोर्स- सोशल मीडिया)
Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में चल रहे SIR प्रोसेस के बाद 4 से 5 लाख मियां वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए जाएंगे। तिनसुकिया जिले में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा और बीजेपी सीधे तौर पर मियाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने लोगों से मियाओं को परेशान करने की अपील करते हुए कहा, “जब उन्हें परेशान किया जाएगा, तभी वे असम छोड़ेंगे।”
आपको बता दें कि ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल असम में बंगाली बोलने वाले मुसलमानों के लिए किया जाता है और इसे अक्सर अपमानजनक माना जाता है। सरमा ने कहा कि वोट की चोरी का मतलब है कि कुछ मियां वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें असम में वोट नहीं देना चाहिए, उन्हें बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। हम यह पक्का कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें।
चल रहे SIR प्रोसेस में हज़ारों बंगाली बोलने वाले मुसलमानों को नोटिस जारी किए गए हैं। सरमा ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जब SIR पूरा हो जाएगा तो बड़ी संख्या में नाम हटा दिए जाएंगे। विपक्ष की आलोचना का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस मुझे जितना चाहे गाली दे सकती है, मेरा काम मियां लोगों को परेशान करना है।”
हिमंत बिस्व सरमा कहा कि उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को शिकायत फॉर्म-7 भरकर मियाओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज करने का निर्देश दिया है। मैंने मीटिंग्स और वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा है कि जहां भी मुमकिन हो शिकायतें दर्ज करें। इससे उन्हें थोड़ी भागदौड़ करनी पड़ेगी, परेशान होंगे और समझेंगे कि असम के लोग अभी भी ज़िंदा हैं।
सरमा ने आगे कहा कि जो भी उन्हें परेशान कर सकता है, उसे करना चाहिए। अगर रिक्शे का किराया 5 रुपये है तो उन्हें सिर्फ 4 रुपये दें। जब उन्हें परेशान किया जाएगा तभी वे असम छोड़ेंगे उन्होंने दावा किया कि मियां अब दुलियाजान पहुंच गए हैं और लोगों को सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं यह खुलेआम कह रहा हूं, मैं इसे छिपा नहीं रहा हूं, मैं खुद अब कह रहा हूं कि आपको उन्हें परेशान करना चाहिए।
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विपक्ष ने इन बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। राइजर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने कहा कि असम के लोगों ने सरमा को मियां समुदाय पर लगातार दबाव डालने के लिए नहीं चुना है। कांग्रेस नेता अमन वादुद ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने असम में संविधान को पूरी तरह से बेकार कर दिया है।






