

PM Modi Manipur Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को मणिपुर पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे ज्यादा प्रभावित चुराचांदपुर का भी दौरा किया। मणिपुर में 2 साल पहले कुकी और मेइती समुदाय के बीच शुरू हुए खूनी संघर्ष के बात यह पहला ऐसा मौका है जब पीएम मोदी सूबे के दौरे पर पहुंचे हैं।
पीएम मोदी ने मणिपुर के चुराचांद पुर पहुंचकर यहां हिंसा प्रभावितों से मुलाकात की। उन्होंने यहां जनता को संबोधित भी किया। वहीं, पीएम मोदी के कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूरी पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन भी किया है। इसके अलावा मणिपुर यूथ कांग्रेस ने राजधानी इंफाल में भी प्रदर्शन किया है।
पीएम मोदी के मणिपुर दौरे को लेकर कांग्रेस पार्टी लगातार उन्हें और भारतीय जनता पार्टी को निशाना बना रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी के दौर को ढोंगर और मणिपुर के हिंसा प्रभावित लोगों के जख्मों पर नमक करार दिया है। उन्होंने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि तीन घंटे का ठहराव कोई सहानुभूति नहीं है।
खड़गे ने आगे कहा कि मणिपुर में हिंसा शुरू होने के बाद से पीएम मोदी ने 46 विदेशी दौरे किए लेकिन अपने ही देश के हिस्से में जाने की फुर्सत नहीं मिली। आखिरी बार वह 2022 में चुनाव प्रचार के लिए मणिपुर पहुंचे थे। वहीं, अब जब जा रहे हैं तो भव्य स्वागत समारोह आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा भी कि आपका 'राजधर्म' कहां है?
इसके अलावा कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने भी इसे लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मैं खुश हूं कि पीएम मोदी को दो साल बाद मणिपुर की जरूरत महसूस हुई है। उन्हें तो बहुत पहले चले जाना चाहिए था। मणिपुर में इतने समय तक हिंसा चलने देना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह भारतीय प्रधानमंत्रियों की परंपरा नहीं रही है।
खड़गे और प्रियंका के अलावा कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने भी पीएम मोदी के मणिपुर दौरे को लेकर उन्हें निशाने पर लिया है। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पीएम मोदी के रोड शो पर तंज कसते हुए कहा कि क्या उनका रोड शो उन्हीं सड़कों पर है जहां महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया था। जब महिलाओं को इन सड़कों पर परेड कराई जा रही थी, उस समय प्रधानमंत्री मोदी कहां थे?
आपको बता दें कि मणिपुर में हिंसा की शुरूआत मई 2023 में शुरू हुई थी। जिसके नेपथ्य में हाईकोर्ट का एक निर्णय था। हिंसा शुरू हुए 2 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। यहां हुई हिंसक घटनाओं में 300 से ज्यादा लोगों की जान गई है। इसके साथ ही 1500 लोग घायल और 67,000 लोग विस्थापित हुए हैं।