निशानेबाज: परदे में रहने दो, परदा न हटाओ फाइल के बारे में मत बताओ

Bureaucracy File Delay: फाइल सिर्फ कागज नहीं, सत्ता और सिस्टम का प्रतीक है। निजी दस्तावेजों से लेकर सरकारी राज तक, फाइलें हमारी ज़िंदगी और लोकतंत्र दोनों की रफ्तार तय करती हैं।
Sharpshooter: Leave it behind the curtain, don't remove the curtain, don't talk about the file.
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Hidden Government Files: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमें हर महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से फाइल में रखने की आदत है। हर व्यक्ति को क्लिप फाइल या बॉक्स फाइल का उपयोग सीखना चाहिए, अपना जन्म प्रमाणपत्र, एसएससी पास होने का सर्टिफिकेट, कॉलेज-यूनिवर्सिटी की डिग्रियां, खेल या अन्य एक्टिविटी के प्रमाणपत्र फाइल में संभालकर जतन से रखी तो कभी भी काम आते हैं। पुराना पत्रव्यवहार भी फाइल में रखा जा सकता है।'

हमने कहा, 'सरकारी कार्यालयों में फाइलों का अंबार लगा रहता है। कोर्ट में भी मामले-मुकदमे की फाइलों का गट्ठा नजर आएगा। वकीलों के यहां बेरसारी फाइलें मौजूद होती हैं, फाइल की चाल कछुए से भी धीमी होती है। वह एक टेबल से दूसरे टेबल तक बड़ी मुश्किल से पहुंचती है। अफसरशाही में अटकी हुई फाइल की वजह से प्रोजेक्ट लटक जाते हैं और लागत बढ़ जाती है। धूल खाती फाइलों की वजह से हमारे लोकतंत्र की प्रगति रुक जाती है। कुछ राज्यमंत्री इसलिए परेशान रहते हैं कि उनके पास फाइल ही नहीं पहुंचती।'

पड़ोसी ने कहा, 'पुरानी फाइलों में कई रहस्य छुपे रहते हैं। इसलिए ऐसी फाइल का सार्वजनिक रूप से जिक्र नहीं करना चाहिए, स्व. अजीत पवार ने 15 जनवरी को सबके सामने कहा था कि उनके पास बीजेपी नेताओं के घोटाले की फाइल है जिसे शीघ्र ही उजागर किया जाएगा। अजीत ने कहा था कि 1995-99 में शिवसेना-बीजेपी की सरकार थी। चुनाव हारने से सत्ता छिन गई। फिर कांग्रेस-एनसीपी की सरकार बनी जिसमें मुझे कृष्णा घाटी विकास निगम की जिम्मेदारी मिली। तब पुरंदर लिफ्ट इरिगेशन की लागत 330 करोड़ रुपये बताई गई थी। मुझे मालूम पड़ा कि उसमें 100 करोड़ रुपये पार्टी फंड के नाम पर और 10 करोड़ रुपये अधिकारियों की रिश्वत के नाम पर थे। मैंने पिछली सेना-बीजेपी सरकार की योजना को रद्द कर दिया और नया टेंडर 220 करोड़ रुपये में पास करवाया, बीजेपी के इस भ्रष्टाचार की फाइल आज भी मेरे पास मौजूद है।'

हमने कहा, 'इस रहस्योद्घाटन का आखिर क्या नतीजा निकला। इसीलिए कहा गया है कि पानी में रहकर मगर से बैर नहीं करना चाहिए, अब वह फाइल कभी सामने नहीं आएगी। पता नहीं, कब कौन सी फाइल जानलेवा बन जाए। इसलिए परदे में रहने दो, परदा न हटाओ, परदा जो हट गया तो भेद खुल जाएगा।"

लेख-चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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