मैतेई समुदाय से ताल्लुक और बीरेन सिंह के विरोधी: आखिर कौन हैं युमनाम खेमचंद, BJP ने क्यों सौंपी मणिपुर की कमान

Who is Yumnam Khemchand Singh: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म होने से ठीक पहले बीजेपी ने नया सीएम चुन ल‍िया है। अब सवाल यह है कि आखिर युमनाम खेमचंद को ही BJP ने CM क्यों चुना है?
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युमनाम खेमचंद सिंह (डिजाइन फोटो)
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Manipur New CM: पूर्वोत्तर भारत के हिंसाग्रस्त राज्य मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म होने से ठीक पहले बीजेपी ने नया सीएम चुन ल‍िया है। मंगलवार को व‍िधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लग चुकी है। जिसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर युमनाम खेमचंद को ही BJP ने CM के तौर पर क्यों चुना है?

युमनाम खेमचंद सिंह के सीएम कैंडिडेट चुने जाते ही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह जल्द ही सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राजभवन जाएंगे और उनके कैबिनेट का गठन भी जल्द ही साफ हो जाएगा।

जानिए कौन हैं युमनाम खेमचंद?

युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर में एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से आने वाले खेमचंद सिंह का मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर शानदार रहा है। वह मणिपुर विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं और अपनी निष्पक्ष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। पिछली सरकार में, उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले थे।

BJP ने युमनाम क्यों चला दांव?

मैतेई समुदाय से ताल्लुक रखने वाले युमनाम खेमचंद सिंह को एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जिन्हें सभी समुदायों का समर्थन प्राप्त है। उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो हर समूह के साथ काम कर सकते हैं। शायद यही वजह है कि बीजेपी ने उन पर दांव लगाया है।

बीरेन सिंह के विरोधी हैं युमनाम!

भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का विरोधी माना जाता है और उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह शांति प्रक्रिया को लेकर गंभीर है और सभी समुदायों को साथ लेकर चलना चाहती है।

गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 में शुरू हुई व्यापक हिंसा के दो साल तक खिंचने के बाद राज्य के पूर्व सीएम एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद मणिपुर में 13 मई 2025 को राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। जिसके छह महीने की अवधि से पहले 5 अगस्त को फिर 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।

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