
Hostel Repair Delay (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal Girls Hostel: अल्पसंख्यक वर्ग की छात्राओं को तकनीकी शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण सुलभ कराने के उद्देश्य से यवतमाल में आठ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से एक सुसज्जित छात्रावास का निर्माण किया गया था। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह नई-नवेली इमारत आज भी अनुपयोगी पड़ी हुई है। कोरोना काल में इसका उपयोग ‘क्वारंटाइन सेंटर’ के रूप में किया गया था, लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद यह भव्य इमारत आज भी एक तरह से ‘क्वारंटाइन’ ही बनी हुई है। अब तक यहां छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया गया है।
हाल ही में अल्पसंख्यक विभाग ने इस हॉस्टल की मरम्मत के लिए लगभग पौने दो करोड़ रुपये (1 करोड़ 69 लाख) का अनुदान मंजूर किया है। बावजूद इसके, हॉस्टल वास्तव में कब शुरू होगा, यह सवाल अब भी अनुत्तरित बना हुआ है।
यह चार मंजिला इमारत वर्ष 2019 में धामणगांव मार्ग स्थित शासकीय पॉलिटेक्निक परिसर में बनाई गई थी। परिसर के भीतर हॉस्टल होने से अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए शिक्षा और आवास की उत्कृष्ट सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद थी। इस इमारत के निर्माण पर उस समय कुल 8 करोड़ 36 लाख रुपये खर्च किए गए थे। हालांकि, निर्माण पूर्ण होने के बाद भी इसे छात्राओं के उपयोग में नहीं लाया गया।
करीब डेढ़ वर्ष बाद यवतमाल में कोरोना महामारी फैलने पर इस हॉस्टल का उपयोग संक्रमितों और उनके संपर्क में आए लोगों के लिए ‘क्वारंटाइन सेंटर’ के रूप में किया गया। कुछ महीनों बाद क्वारंटाइन सेंटर बंद होने के पश्चात यह इमारत पूरी तरह उपेक्षित हो गई। इमारत में रखा फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां और अन्य सामग्री चोरों के निशाने पर आ गईं और यहां बार-बार चोरी की घटनाएं होने लगीं। इसके बावजूद प्रशासन ने लंबे समय तक इस ओर ध्यान नहीं दिया।
मीडिया में मामला उजागर होने के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग के उपविभागीय अभियंता ने पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज कराई। मामला दर्ज तो हुआ, लेकिन हॉस्टल शुरू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लगातार बंद रहने के कारण इमारत की स्थिति भी खराब होती चली गई। इसके बाद जिलाधिकारी ने मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा, जिसे मंजूरी मिल गई। 20 जनवरी को अल्पसंख्यक विभाग ने हॉस्टल की मरम्मत के लिए 1 करोड़ 69 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। हालांकि, इस राशि से मरम्मत कार्य कब शुरू होगा और छात्राओं को कब प्रवेश मिलेगा, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है।
अल्पसंख्यक छात्राओं के लिए निर्मित यह छात्रावास वर्षों से बंद पड़े होने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। पूर्व विधायक ख्वाजा बेग और डॉ. वजाहत मिर्जा ने विधानमंडल में भी यह मुद्दा उठाया था। आखिरकार शासन ने इमारत की मरम्मत के लिए निधि मंजूर की है। अब सार्वजनिक बांधकाम विभाग को तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पूर्व विधायक डॉ. वजाहत मिर्जा मामले पर कहा कि सच्चर समिति की रिपोर्ट के बाद राज्य के 32 शहरों में ऐसे छात्रावास बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इनमें यवतमाल और पुसद का भी समावेश था। बाद में प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत जिला स्तर पर इन छात्रावासों का निर्माण किया गया। लेकिन यवतमाल का हॉस्टल आज भी बंद है। इसे शीघ्र शुरू करने के लिए मैंने विधानमंडल में लगातार प्रयास किए थे। अब मरम्मत के बाद कम से कम इसे जल्द शुरू किया जाए, यही अपेक्षा है।






