यवतमाल की 515 दुकानों की लीज विवाद: डॉ. वाघमारे ने हाईकोर्ट में दाखिल की जनहित याचिका

Yavatmal Municipal Council News: यवतमाल नगर परिषद की 515 दुकानों की लीज समाप्त होने के बाद भी 6 साल से नीलामी नहीं। हाईकोर्ट आदेश की अनदेखी पर नगरसेवक डॉ. वाघमारे ने दाखिल की PIL।
Yavatmal Shops Lease PIL In High Court
यवतमाल नगर परिषद (फाइल फोटो, सोर्स - सोशल मिडीया))
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Yavatmal Shops Lease PIL In High Court: यवतमाल नगर परिषद की 34 बाजारपेठों में स्थित 515 दुकान गालों (दुकानों) की लीज (पट्टा) समाप्त होने के बावजूद, पिछले छह वर्षों से उनकी सार्वजनिक नीलामी नहीं किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के वर्ष 2019 के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में नगरसेवक एवं गटनेता डॉ. नीरज वाघमारे ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (रिट याचिका क्र. 4776/2026) दाखिल की है। याचिका में नगर परिषद प्रशासन पर अदालत के आदेशों की अवहेलना और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।

याचिका के अनुसार, यवतमाल नगर परिषद क्षेत्र की कुल 34 बाजारपेठों में 744 दुकान गाले हैं। इनमें से 515 दुकानों की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, जबकि केवल 129 दुकानें ही वैध लीज पर हैं। लीज समाप्त होने के बावजूद कई कब्जेदारों द्वारा दुकानों पर नियंत्रण बनाए रखने से नगर परिषद को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

कम किराया और कथित अनियमितताएं

जानकारी के अनुसार, यवतमाल शहर के मुख्य बाजारों में दुकानों का मासिक किराया मात्र लगभग 5 हजार रुपये है, जिसमें वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। आरोप है कि कई दुकानों को मूल लीजधारकों द्वारा आगे 2 से 4 करोड़ रुपये में हस्तांतरित (ट्रांसफर) कर दिया गया, जबकि नगर परिषद को बेहद कम किराया ही मिलता रहा। डॉ. नीरज वाघमारे ने कहा कि शहर में कई गरीब व्यापारी सड़क किनारे या छोटे शेड में व्यवसाय कर रहे हैं, जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को नियमों की अनदेखी कर अनुचित लाभ दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया लागू कर सभी को समान अवसर दिया जाए।

तत्काल सार्वजनिक नीलामी कराने की मांग

याचिका में सभी 34 बाजारपेठों की 515 दुकानों का पुनः किराया निर्धारण (रेडी रेकनर के अनुसार) कर पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से तत्काल सार्वजनिक नीलामी कराने की मांग की गई है। साथ ही, नगर परिषद के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश देने की अपील भी अदालत से की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एम. पी. खाजांची ने यह याचिका दायर की है। इसमें नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव, नगर परिषद प्रशासन संचालक, जिलाधिकारी यवतमाल तथा नगर परिषद मुख्याधिकारी (सीओ) को प्रतिवादी बनाया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली और राजस्व नीति पर महत्वपूर्ण निर्णय संभावित है।

न्यायालय के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं

18 फरवरी 2019 को उच्च न्यायालय ने इन दुकानों का पुनः किराया निर्धारण कर सार्वजनिक नीलामी प्रक्रिया लागू करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा, 22 जनवरी 2021 को यवतमाल नगर परिषद प्रशासन के संचालक ने भी नीलामी के निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद, स्थानीय प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

याचिका में दावा किया गया है कि इस लापरवाही के कारण नगर परिषद को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिसका उपयोग शहर के विकास कार्यों में हो सकता था। महाराष्ट्र नगरपरिषद अधिनियम के तहत तय अवधि से अधिक समय तक लीज पर संपत्ति देने की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

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