-
शुक्र, 26 जून 2026 ई-पेपर
- Hindi News »
- Uttar Pradesh »
- Bjp Pankaj Choudhary Team Vs Akhilesh Yadav Pda Formula Up 2027 Elections
Explainer: यूपी बीजेपी की नई सोशल इंजीनियरिंग…क्या पंकज चौधरी की टीम सपा के PDA फॉर्मूले को दे पाएगी चुनौती?
- Written By: अक्षय साहू
BJP New Social Engineering: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की इस टीम में ओबीसी और दलितों पर विशेष जोर है।

सपा के पीडीए की काट बनेगी बीजेपी की नई सोशल इंजीनियरिंग (AI जनरेटेड फोटो)
UP BJP New Executive Committee: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने जोर पकड़ना शुरु कर दिया है। पक्ष हो या विपक्ष दोनों ने ही सियासी बयानबाजी के साथ अपनी-अपनी गोटियां सेट करने में लग गए हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 जून को उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक स्तर पर व्यापक बदलाव करते हुए कुछ बड़े फेरबदल किया है। जिसका सीधा असर अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले पर पड़ सकता है।
बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले बड़े झटके से सीखते हुए अब नई रणनीति पर चलने का फैसला किया है। पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनने के सात महीने बाद अब पार्टी ने उनकी नई प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने साफ संकेत दिए हैं कि वो जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के जरिए समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले का मुकाबला करने की रणनीति तैयार की है।
सामाजिक संतुलन बनाने में लगी बीजेपी
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी पहले से ही सरकार और संगठन के बीच समाजिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की कमान जहां परंपरागत सवर्ण नेतृत्व के पास है, वहीं सगंठन की जिम्मेदारी ओबीसी समाज से आने वाले पंकज चौधरी के पास है और अब नई प्रदेश टीम के गठन में इसी संतुलन की झलक साफ देखने को मिलती है।
सम्बंधित ख़बरें
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार, नए खुलासे होने के मिले संकेत!
ग्वालियर में प्रहलाद पटेल का राहुल गांधी पर निशाना, बोले- संविधान की बात करने वालों का इतिहास देश जानता है
यूपी बीजेपी की नई 64 सदस्यीय टीम मैदान में! आज पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह फूकेंगे चुनावी शंखनाद
चुनावी साल में यूपी भाजपा को नए चेहरों का सहारा, घोषित कार्यकारिणी में वर्षों से जमे जमाए चेहरे नदारद
नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन
भाजपा ने अपनी नई प्रदेश कार्यकारिणी में छह क्षेत्रीय अध्यक्ष, 19 उपाध्यक्ष, आठ महामंत्री और 19 प्रदेश मंत्री बनाए गए हैं। पार्टी ने लगभग 40 प्रतिशत प्रमुख पद ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार और कायस्थ समुदाय से आने वाले नेताओं को दिए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ओबीसी और दलित नेताओं को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सामाजिक संतुलन साधने में लगी बीजेपी (AI जनरेटेड फोटो)
भाजपा का मकसद सिर्फ जातीय प्रतिनिधित्व देना नहीं, बल्कि उन वर्गों को अपने साथ दोबारा जोड़ना भी है, जिनका समर्थन 2024 के लोकसभा चुनाव में कमजोर पड़ता दिखाई दिया था। यही कारण है कि नई टीम बनाते समय पार्टी में युवा और अनुभवी नेताओं के मिश्रण के साथ क्षेत्रीय समीकरणों का भी खास ध्यान रखा गया है।
छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में चार ओबीसी
बीजेपी ने अपने सभी पुराने क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलते हुए छह नए चेहरों को मौका दिया है। दिलचस्प बात ये है कि इन छह में से चार ओबीसी समाज से आते हैं। जबकि दो सवर्ण समुदाय से हैं। इस फैसले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि समाजवादी पार्टी लंबे समय से गैर-यादव पिछड़ी जातियों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश करती आ रही है।
भाजपा ने बड़ा दाव खेलते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जिम्मा गुर्जर समाज से आने वाले नवाब सिंह नागर को सौंपी है। पश्चिमी यूपी में गुर्जर वोटों पर समाजवादी पार्टी भी लगातार फोकस कर रही है। ऐसे में बीजेपी ने इस वर्ग को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।
पूरन लाल लोधी को ब्रज क्षेत्र की कमा
वहीं, पार्टी ने पूरन लाल लोधी पर दांव लगाने का फैसला करते हुए उन्हें ब्रज क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी है। 2024 के चुनाव में लोध समाज का एक हिस्सा भाजपा से दूर होता नजर आया था। जिसका सीधा असर फिरोजाबाद, मैनपुरी, बदायूं, एटा और आंवला जैसी प्रमुख सीटों पर देखने को मिला था। भाजपा पूरन लाल लोधी को आगे करके लोध समुदाय को फिर से अपने साथ करना चाहती है।
बीजेपी के लिए पीडीए की काट ढूंढना जरूरी (सोर्स- सोशल मीडिया)
इसी तरह कानपुर क्षेत्र की कमान राम किशोर साहू को दी गई है। जबकि काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी अशोक चौरसिया को मिली है। वहीं अवध क्षेत्र में ब्राह्मण समाज से अवधेश द्विवेदी और गोरखपुर क्षेत्र में भूमिहार समुदाय के विनोद राय को उपाध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल और अवध के पारंपरिक वोट बैंक को भी अपने साथ बनाए रखने की कोशिश की है।
संगठन में दलित-ओबीसी को प्राथमिकता
भारतीय जनता पार्टी ने नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का स्पष्ट संदेश दिया है। पार्टी ने नए बनाए गए 19 उपाध्यक्षों में सात ओबीसी, दो दलित, चार ठाकुर, तीन ब्राह्मण, चार ठाकुर, तीन ब्राह्मण, दो वैश्य और एक भूमिहार नेताओं को शामिल किया है।
प्रदेश मंत्रियों की सूची में भी 19 में से 12 पद दलित और ओबीसी समुदाय के नेताओं को मिले हैं। इनमें नौ ओबीसी और तीन दलित नेता शामिल हैं। बाकी पदों पर ब्राह्मण, भूमिहार, कायस्थ और ठाकुर समुदाय के नेताओं को जगह दी गई है। इससे स्पष्ट है कि बीजेपी ने उन्हीं सामाजिक वर्गों पर विशेष फोकस किया है, जिनके वोटों में 2024 के चुनाव के दौरान गिरावट दर्ज की गई थी।
2024 की हार से मिला सबक
बीजेपी के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन के लिहाज से उतना अच्छा नहीं रहा था। 80 सीटों वाले राज्य में भाजपा केवल 33 सीटें जीत सकी थी। 2019 की तुलना में पार्टी को 31 सीटों का नुकसान हुआ था। यही कारण है कि केंद्र में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए बीजेपी को सहयोगी दलों पर पहले से अधिक निर्भर होना पड़ा।
2024 में बीजेपी की खराब प्रदर्शन का सीधा फायदा समाजवादी पार्टी को हुआ था। सपा ने 37 सीटें जीतकर उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनने का रिकॉर्ड बनाया। पार्टी की इस सफलता का सबसे बड़ा आधार पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का व्यापक समर्थन था। बीजेपी का मानना है कि पार्टी का पारंपरिक सामाजिक समीकरण 2024 में कमजोर पड़ा। खासकर गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों का एक हिस्सा सपा की ओर गया। पार्टी अब उन्हें फिर से अपनी ओर करने की कोशिश कर रही है।
पीडीए बनाम BJP की नई सोशल इंजीनियरिंग
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लगातार पीडीए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फार्मूले को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बता रहे हैं। अखिलेश का दावा है कि इन वर्गों की आबादी उत्तर प्रदेश में 85 से 90 प्रतिशत तक है। इसी रणनीति के दम पर सपा ने 2024 के चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और कई ऐसी सीटें भी जीतीं, जिन्हें बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता था।
अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूले पर फोकस (सोर्स- सोशल मीडिया)
बीजेपी अब उसी रणनीति का जवाब अपनी नई सोशल इंजीनियरिंग के जरिए देने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने संगठन में गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित और पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक के बीच संतुलन बनाते हुए व्यापक प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
पश्चिम से पूर्वांचल तक अलग-अलग रणनीति
बीजेपी की रणनीति क्षेत्रवार भी अलग दिखाई देती है। पूर्वांचल में पार्टी का फोकस कुर्मी, राजभर, कुशवाहा और अन्य गैर-यादव ओबीसी समुदायों पर है। यही वे वर्ग हैं जिनमें 2024 के दौरान पार्टी का आधार कमजोर हुआ था।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर, जाट, सैनी और ठाकुर समुदाय के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। वहीं अवध क्षेत्र में ब्राह्मण नेतृत्व के साथ गैर-जाटव दलित समुदाय, विशेषकर पासी समाज को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश हुई है। ब्रज क्षेत्र में लोध और शाक्य समाज को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी उन क्षेत्रों में अपना खोया आधार वापस हासिल करना चाहती है, जहां लोकसभा चुनाव में उसे नुकसान उठाना पड़ा था।
पंकज चौधरी के सामने बड़ी चुनौती
ओबीसी समुदाय से आने वाले पंकज चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी पहली बार 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल संगठन को मजबूत करना नहीं, बल्कि 2024 में खिसके सामाजिक आधार को दोबारा पार्टी के साथ जोड़ना भी है।
यह भी पढ़ें- यूपी बीजेपी की नई 64 सदस्यीय टीम मैदान में! आज पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह फूकेंगे चुनावी शंखनाद
बीजेपी लगातार चार बड़े चुनाव 2014 और 2019 के लोकसभा तथा 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। अब पार्टी की कोशिश उत्तर प्रदेश में सत्ता की हैट्रिक लगाने की होगी। लेकिन यह राह आसान नहीं है। एक दशक से सत्ता में रहने के कारण सरकार के खिलाफ संभावित एंटी-इनकंबेंसी भी पार्टी के सामने चुनौती बन सकती है। ऐसे में नई प्रदेश टीम को केवल संगठनात्मक मजबूती ही नहीं दिखानी होगी, बल्कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, सामाजिक समीकरणों को दोबारा साधने और विपक्ष की रणनीति का प्रभावी जवाब देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
Bjp pankaj choudhary team vs akhilesh yadav pda formula up 2027 elections
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
बड़नगर स्टंट विवाद पर शहर काजी की सफाई, बोले- दो अखाड़ों की प्रतिद्वंद्विता थी, भावनाएं आहत करना उद्देश्य नहीं
Jun 26, 2026 | 10:34 AM‘अगर मेरी बेटी दोषी है तो उसे भी खाई में फेंक दो’; केतन मर्डर केस में आरोपी सिया के पिता का रो-रोकर बुरा हाल
Jun 26, 2026 | 10:33 AMराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने 8 आरोपियों को किया गिरफ्तार, नए खुलासे होने के मिले संकेत!
Jun 26, 2026 | 10:32 AMनवभारत निशानेबाज: कैसी आशंका और कैसा डर, आपके घर लगेगा स्मार्ट मीटर
Jun 26, 2026 | 10:32 AMYRKKH Twist: ‘ये रिश्ता…’ में बड़ा धमाका! अभिरा की जिंदगी में मचेगा तूफान, तलाक के बाद नया ड्रामा शुरू
Jun 26, 2026 | 10:30 AMयवतमाल की 515 दुकानों की लीज विवाद: डॉ. वाघमारे ने हाईकोर्ट में दाखिल की जनहित याचिका
Jun 26, 2026 | 10:30 AMApple यूजर्स को बड़ा झटका, MacBook और iPad हुए महंगे, अब iPhone खरीदना भी पड़ सकता है भारी
Jun 26, 2026 | 10:26 AMवीडियो गैलरी

भूकंप आने से पहले क्यों अजीब हरकतें करते हैं जानवर? जानिए इसके पीछे का वो विज्ञान जो इंसान नहीं देख पाते!
Jun 25, 2026 | 10:53 PM
ट्रंप और JD वेंस की सीक्रेट मीटिंग की इनसाइड स्टोरी, जिसमें सऊदी अरब-भारत को लेकर बना था बड़ा प्लान- VIDEO
Jun 25, 2026 | 10:34 PM
धार में मोहर्रम की रस्म पर आधी रात हुआ बवाल, पुलिस एक्शन से मचा हड़कंप! देखें VIDEO
Jun 25, 2026 | 08:33 PM
Agra में अवैध मजारों पर गरजा बुलडोजर! हिंदूवादी संगठनों की खुली चेतावनी, बोले- अब नहीं चलेगा अवैध कब्जा, VIDEO
Jun 25, 2026 | 08:22 PM
धरती फटी और समा गए लाखों लोग! वेनेजुएला में भूकंप ने मचाई भारी तबाही, देखें VIDEO
Jun 25, 2026 | 08:12 PM
कोलकाता में बड़ा हादसा! निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने से मलबे में दबे कई मजदूर, मची चीख-पुकार
Jun 25, 2026 | 02:14 PM













