
उमरखेड़ किसानों ने किया विरोध (सौजन्य-नवभारत)
Wardha-Yavatmal-Nanded Railway: वर्धा-यवतमाल-नांदेड़ रेल मार्ग के लिए प्रस्तावित अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की अन्यायपूर्ण नोटिसों के खिलाफ उमरखेड तहसील के रेल परियोजना से प्रभावित किसानों ने तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए स्थानीय विश्रामगृह में सार्वजनिक विरोध दर्ज कराया।
21 अगस्त 2025 को उपजिलाधिकारी तथा भूमि अधिग्रहण अधिकारी, यवतमाल द्वारा पटवारियों के माध्यम से जारी की गई नोटिसों को किसानों ने स्वीकार करने से इनकार करते हुए वापस लौटा दिया। इस अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण में मालेगांव, बिटरगांव, दहागांव, बेलखेड़, कैलासनगर, कुपटी, पलशी, नागापुर, मुलावा, तरोडा, दत्तनगर और कलमुला सहित कई गांव शामिल हैं।
वर्ष 2018 में पहले चरण में प्रति एकड़ 16.50 लाख रुपये का दर घोषित किया गया था, जबकि 2025 में प्रस्तावित अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के लिए केवल 15 लाख रुपये प्रति एकड़ का दर तय किया गया है। इससे किसानों में भारी असंतोष फैल गया है।
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न्यायसंगत दर, नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से भूमि अधिग्रहण होने तक किसी भी अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की नोटिस स्वीकार नहीं की जाएगी, ऐसी कड़ी चेतावनी संजय बिजोरे पाटिल, केशवराव सूर्यवंशी, परमेश्वर कदम, बालाजी नरवाडे, देविदास वावुतकर, शिवाजी नजरधने, नानाराव कदम, रामदास हुबे, आकाश बरडे, निरंजन जाधव, ओमप्रकाश चव्हाण और मोहन देशमुख सहित अनेक किसानों ने दी है।
किसानों का आरोप है कि बढ़ती महंगाई, भूमि की स्थिति, उत्पादन क्षमता और बाजार मूल्य की अनदेखी करते हुए एक समान दर लागू की जा रही है। भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार वर्गीकरण आधारित और पारदर्शी मूल्यांकन किए बिना यह प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिससे किसानों में रोष है।






