Yavatmal News: टिपेश्वर में बाघ गणना का कार्य पूरा, अब ‘WII’ की रिपोर्ट का इंतजार

Tipeshwar Wildlife Sanctuary: टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की वार्षिक गणना पूरी हो चुकी है और अब भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे बाघों की वास्तविक संख्या सामने आएगी।
Tiger Population
Tipeshwar Wildlife Sanctuary:टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Maharashtra Tiger Census: महाराष्ट्र के यवतमाल जिले की शान माने जाने वाले टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य में बाघों की वार्षिक गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। वहीं, पड़ोसी पैनगंगा वन्यजीव अभयारण्य में यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है और आगामी 4 से 5 दिनों में इसके पूर्ण होने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे बाघों की वास्तविक संख्या का खुलासा होगा।

बीते वर्ष नवंबर माह में देशभर में व्याघ्र गणना की शुरुआत की गई थी। यह गणना राष्ट्रीय व्याघ्र संवर्धन प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के माध्यम से की जाती है, जिसमें राज्य वन विभाग की सक्रिय भागीदारी रहती है। महाराष्ट्र में 6 व्याघ्र प्रकल्प, 48 अभयारण्य और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों में 16 नवंबर से व्याघ्र गणना की शुरुआत हुई थी।

वन अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण

इसके बाद देहरादून में वन विभाग के अधिकारियों की बैठक आयोजित कर बाघों से संबंधित आंकड़े एकत्र करने की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई। सितंबर माह में पेंच व्याघ्र प्रकल्प में मास्टर ट्रेनरों की कार्यशाला आयोजित की गई, जिसके पश्चात अक्तूबर में जिलास्तर पर वन अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।

तीन चरणों में गणना

यवतमाल जिले के विस्तीर्ण टिपेश्वर अभयारण्य में बाघों की गणना तीन चरणों में की गई।

तकनीक से हो रही गिनती

  • पूर्व में बाघों की गणना केवल पैरों के निशानों (पगमार्क) के आधार पर की जाती थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और आधुनिक हो गई है।
  • जमीनी सर्वेक्षण: वनकर्मियों द्वारा पैदल भ्रमण कर मल (Scat), पेड़ों पर नाखूनों के निशान और शिकार की उपलब्धता से जुड़े साक्ष्य एकत्र किए गए।
  • सैटेलाइट मैपिंग: उपग्रहों की सहायता से जंगल के घनत्व, जलस्रोतों और भौगोलिक स्थिति का विश्लेषण किया गया।
  • कैमरा ट्रैप: जंगल के रणनीतिक स्थानों पर सेंसरयुक्त कैमरे लगाए गए, जिससे बाघों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सके।

देश में बाघों की बढ़ती संख्या

वर्ष बाघों की संख्या
2006 1,411
2010 1,706 (21% वृद्धि)
2014 2,226 (30% वृद्धि)
2018 2,967 (33% वृद्धि)
2022 3,682 (23% वृद्धि)

देशभर में बाघ संरक्षण के प्रयासों से मिली यह सफलता वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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