
Navegaonbandh Tourism Complex:गोंदिया जिले के नवेगांवबांध राष्ट्रीय उद्यान (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Tourism Development: नवेगांवबांध राष्ट्रीय उद्यान का पर्यटन संकुल आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। कभी देश-विदेश में प्रसिद्ध रहा यह पर्यटन संकुल अब अधिकारियों की अनदेखी और निधि की कमी के कारण उपेक्षा का शिकार हो गया है। स्थानीय नागरिकों ने इसकी पुरानी शान वापस लाने की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों, पर्यटन मंत्री, पालकमंत्री, विधायक और सांसद को ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
नवेगांवबांध राष्ट्रीय उद्यान का पर्यटन संकुल लगभग तीन हजार एकड़ क्षेत्र में फैले विशाल जलाशय के किनारे स्थित है। इसके समीप राजस्व विभाग के अंतर्गत 500 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह प्रसिद्ध पर्यटन संकुल करीब 40 वर्ष पहले बनाया गया था। एक समय यह स्थान पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र था, लेकिन समय के साथ रखरखाव और निवेश के अभाव में इसकी स्थिति बेहद खराब हो गई है।
नवेगांवबांध फाउंडेशन की ओर से मांग की गई है कि प्राकृतिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए एक समग्र विकास प्लान तैयार किया जाए और इसके लिए 50 करोड़ रुपये की निधि मंजूर की जाए, ताकि वर्ष 2026-27 में पर्यटन संकुल के विकास कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पर्यटन संकुल को बीओटी (BOT) आधार पर प्राथमिकता के साथ विकसित किया जाए अथवा इसे वन समिति को हस्तांतरित किया जाए, जिससे संरक्षण और विकास दोनों संभव हो सकें। विधायक राजकुमार बडोले ने भी एक वर्ष पूर्व इस परिसर के लिए विकास प्लान तैयार करने और 50 करोड़ रुपये की निधि मंजूर करने की मांग की थी।
विकास प्लान के अंतर्गत पर्यटन संकुल का नवनिर्माण किया जाए, जिसमें नया गार्डन, वैभव गार्डन, मनोहर गार्डन, हॉलिडे होम्स गार्डन, बच्चों के पार्क की मरम्मत, जल पर्यटन की सुविधा, जलाशय में बोटिंग, सी-प्लेन राइड, संजयकुटी परिसर का सौंदर्यीकरण, पैराग्लाइडिंग, स्काई टावर, मेडिटेशन हॉल, म्यूजिकल फव्वारे, चिड़ियाघर का पुनः उद्घाटन, म्यूजियम, मिनी ट्रेन, तालाब की गहराई बढ़ाना, पक्षी आश्रय स्थल का विकास और सड़कों की मरम्मत जैसे कार्य शामिल हैं।
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नवेगांवबांध फाउंडेशन के सचिव रामदास बोरकर के अनुसार, यदि इस क्षेत्र का नियोजित तरीके से विकास किया जाए तो यह पर्यटन संकुल तालाब परिसर, जंगल सफारी, पक्षी निरीक्षण स्थल, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के साथ मिलकर देश-विदेश के पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण बन सकता है।






