

Yavatmal News: शिवाई-ई इलेक्ट्रिक बस सेवा में दिव्यांग यात्रियों को टिकट रियायत नहीं दिए जाने का मुद्दा 12 जनवरी को नवभारत में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद राज्य परिवहन तंत्र ने इस पर गंभीर संज्ञान लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता लखन लोंढे द्वारा दिए गए निवेदन के बाद महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एमएसआरटीसी) ने आधिकारिक उत्तर जारी करते हुए दिव्यांग व्यक्तियों को 75 प्रतिशत तथा उनके एक सहायक को 50 प्रतिशत किराया रियायत देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
नवभारत में प्रकाशित खबर के चलते यह विषय न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्यस्तर पर भी चर्चा का केंद्र बन गया है। एमएसआरटीसी ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया है कि यात्रा किराया रियायत संबंधी नीति तय करने का अधिकार शासन स्तर पर है और शिवाई-ई इलेक्ट्रिक बसों में रियायत देना एक नीतिगत निर्णय है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि शिवाई-ई बस सेवा में रियायत न दिए जाने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर शासन की नीति से जुड़ी हुई है।
संबंधित शासकीय निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन का अभाव सामने आया है। इलेक्ट्रिक बस सेवाओं को सामाजिक न्याय के दायरे से बाहर रखने का प्रयास किया जा रहा था। “नीतिगत मामला” बताकर दिव्यांग अधिकारों के क्रियान्वयन में देरी हो रही थी। इस खबर के बाद दिव्यांग अधिकार आंदोलन को बल मिला है। दिव्यांग संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में संवेदनशीलता बढ़ी है और शिवाई-ई इलेक्ट्रिक बसों में तत्काल रियायत लागू करने की मांग और अधिक तेज हो गई है।
महागांव के सामाजिक कार्यकर्ता लखन लोंढे ने कहा कि “नवभारत ने यह मुद्दा निर्भीकता से उठाया, इसलिए प्रशासन को स्पष्टीकरण देना पड़ा। लेकिन केवल प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं है; जब तक वास्तव में रियायत लागू नहीं होती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।”