ठाणे में सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला, 6 NCP नेता बरी

Thane News: ठाणे की अदालत ने 2012 में हुए राजनीतिक विवाद के दौरान हुई सामाजिक कार्यकर्ता हत्या के छह एनसीपी आरोपियों को सबूतों की कमी पर बरी कर दिया।
Thane court acquits NCP workers in 2012 murder case
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Thane Murder Case: ठाणे की अदालत ने 13 साल चली सुनवाई के बाद 2021 में हुई सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या मामले में छह राकांपा के कथित कार्यकर्ताओं को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त और निष्पक्ष साक्ष्य पेश नहीं किए।

जिला एवं सत्र न्यायालय, ठाणे के प्रधान न्यायाधीश एसबी अग्रवाल ने मंगलवार को अविभाजित राष्ट्रवादी कांगग्रेस पार्टी (NCP) के कथित छह कार्यकर्ताओं को सामाजिक कार्यकर्ता हत्या मामले में बरी कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष को झटका देते हुए कहा कि मामले में निष्पक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए।

क्या था मामला?

अभियोजन के अनुसार, यह हत्या 2012 के नगर महापालिका चुनावों के दौरान राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण हुई थी। पीड़ित की पत्नी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही थीं, जबकि आरोपी कथित रूप से राकांपा कार्यकर्ता थे। जनवरी 2012 में चुनाव बूथ की स्थापना को लेकर विवाद पैदा हुआ था।

हत्या की कथित घटना

शिकायतकर्ता रोनाल्ड एंथोनी इसाक ने आरोप लगाया कि आनंद गणपत साल्वे, गणपत पुनाजी साल्वे, गौतम गोविंद मोरे, संतोष सागर बंसोडे, अमोल जीजा कांबले और संतोष भीवा वेटकर ने 17 जून, 2012 को उस पर तलवारों से हमला किया। पीड़ित को 28 टांके लगाने पड़े।

साक्ष्य और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल

बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजन सालुंके ने अभियोजन और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। न्यायाधीश अग्रवाल ने टिप्पणी की कि कथित चश्मदीदों द्वारा हमले को देखा जाना असंभव प्रतीत होता है। अधिकांश गवाह या तो मुखबिर के मित्र, कर्मचारी या राजनीतिक रूप से उससे जुड़े थे। अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि हथियारों की बरामदगी में कई खामियां थीं, जिससे अभियोजन की दलील कमजोर साबित हुई। इसी कारण अदालत ने छह आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया और उन्हें मामले से बरी कर दिया।

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