यवतमाल में छात्रावास घोटाला: CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, फर्जी छात्र संख्या और बिना टेंडर खरीद का बड़ा खेल

Yavatmal Social Welfare Hostel Scam: यवतमाल में समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों में फर्जी उपस्थिति, बिना निविदा खरीद और अनुदान में बड़ी वित्तीय अनियमितता का CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ है।
CAG Report On Yavatmal Social Welfare Hostel Scam
यवतमाल में छात्रावास घोटाला (प्रतीाकात्मक तस्वीर, सोर्स: AI)
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CAG Report On Yavatmal Social Welfare Hostel Scam: यवतमाल जिले के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित शासकीय एवं अनुदानित छात्रावासों के संचालन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखा परीक्षा में वित्तीय अनियमितताओं, निधि के उपयोग में खामियों तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं में गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। कैग की टिप्पणियों के बाद राज्यभर के समाज कल्याण छात्रावासों की जांच की संभावना बढ़ गई है।

फर्जीवाड़े का खेल: कागजों पर छात्र और जेब में अनुदान

कैग द्वारा की गई लेखा परीक्षा (Audit) में सबसे गंभीर खुलासा विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर हुआ है। इस दौरान यह पाया गया कि कई छात्रावासों में वास्तविक विद्यार्थियों की संख्या और अभिलेखों में दर्ज संख्या में अंतर है। कुछ स्थानों पर क्षमता से कम छात्र रहने के बावजूद पूरी क्षमता के आधार पर अनुदान लेने की आशंका व्यक्त की गई है।

कैग की रिपोर्ट में भोजन सामग्री, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, गणवेश तथा अन्य आवश्यक सामान की खरीद प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया है। कुछ मामलों में बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए सीधे खरीद किए जाने की बात सामने आई है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।

अनुदानित हॉस्टल भी शक के घेरे में

कैग ने केवल शासकीय ही नहीं, बल्कि अनुदानित छात्रावासों के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों की उपस्थिति, आवास व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता तथा वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता की कमी पाए जाने के कारण संबंधित संस्थाओं की विस्तृत जांच किए जाने की संभावना है।

कैग की रिपोर्ट के बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों के छात्रावासों की जानकारी मांगे जाने की चर्चा है। यदि यवतमाल सहित अन्य जिलों के छात्रावासों की व्यापक जांच होती है तो वर्षों से चल रही अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

विद्यार्थियों के हित पर उठे सवाल

समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए बेहतर आवास और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन निधि के कथित दुरुपयोग, सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विभिन्न संगठनों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा छात्रावास व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है।

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