पूस नदी पुल भ्रष्टाचार केस पहुंचा वर्षा बंगला: दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की मांग!

Pus River Bridge Pusad: पूस नदी पुल निर्माण में अनियमितता का मामला मुख्यमंत्री दरबार में। भाजपा नेताओं ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और जांच की मांग की। 14.91 करोड़ का प्रोजेक्ट विवादों में।
Allegations of irregularities in Pus River bridge construction reach CM Devendra Fadnavis.
पूस नदी भ्रष्टाचार मामला (सौजन्य-नवभारत)
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CM Devendra Fadnavis Complaint: पुसद–दिग्रस मार्ग पर एमडीआर 51 के अंतर्गत पूस नदी पर बन रहे पुल के निर्माण में कथित अनियमितताओं का मामला अब सीधे मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच गया है। स्थानीय भाजपा पदाधिकारियों ने लगभग 14.91 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रकल्प को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा संबंधित विभागों को 18 फरवरी को लिखित शिकायत सौंप दी है।

यह कार्य 5253/टीसी अंतर्गत स्वीकृत हुआ था और 5 अगस्त 2026 तक पूर्ण होना अपेक्षित था। परंतु फरवरी 2026 तक भी कार्य अधूरा होने से देरी को लेकर प्रश्नचिह्न खड़े किए जा रहे हैं। भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रवि निर्मल ग्यानचंदानी, जिला महासचिव दीपकसिंह परिहार, जिला कार्यालय प्रमुख एड. विश्वास भवरे तथा उत्तर भारतीय आघाड़ी के जिला अध्यक्ष अश्विन रमेशलाल जायसवाल ने जिलाधिकारी एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ अब सीधे मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन प्रस्तुत किया है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, निर्माण स्थल पर आवश्यक सूचना फलक का अभाव है, समयावधि बढ़ाने संबंधी आदेश सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, यातायात सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं तथा मजदूरों की सुरक्षा में भी गंभीर त्रुटियां हैं। यह मार्ग पुसद शहर को दिग्रस, नागपुर और राष्ट्रीय राजमार्ग 361 से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, जहां भारी यातायात रहता है।

ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की कमी आम नागरिकों के लिए जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। इसके अतिरिक्त कंक्रीट परीक्षण, तकनीकी अभिलेख, क्यूब टेस्ट तथा अन्य गुणवत्ता संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। कुछ स्थानों पर लोहे की सरियों के खुले और जंग लगे होने की बात भी शिकायत में कही गई है।

प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया होती तो शासन को आर्थिक लाभ मिलता

शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि यदि यह कार्य पूरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता, तो अधिक “बिलो रेट” प्राप्त होकर शासन को आर्थिक लाभ हो सकता था।

मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप की मांग

सार्वजनिक निधि से निर्मित हो रहे इस महत्वपूर्ण प्रकल्प में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की गई है। पूरे पुसद तहसील की नजर अब इस प्रकरण पर टिकी हुई है।

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